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अस्पताल में सुविधाओं का टोटा

Sat, 06 Jun 2015 01:19 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला
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ट्विन सिटी के अस्पताल का अभिप्राय इलाज के लिए इंतजार बन गया है। पर्ची बनवानी है तो लाइन में लगो, डॉक्टर से मिलने के लिए लाइन में लगो और फिर दवा लेने के लिए लाइन में लगो।
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यह हालात हर रोज देखने को मिलते हैं, जबकि इन हालातों में बदलाव नहीं दिख रहा। सबसे अहम इन सभी हालातों में मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। मरीज इन असुविधाओं से जूझते हुए इलाज करवा रहे हैं, जबकि जो मरीज दाखिल हैं उनके लिए भी हालात ठीक नहीं हैं। मरीजों के साथ आए तीमारदार भी इन असुविधाओं को कोस रहे हैं।

जिला मुख्यालय का यह सिविल अस्पताल करीब तीन लाख लोगों को इलाज की सुविधा देने में जुटा है। इस सिविल अस्पताल में 22 चिकित्सक हैं, जबकि अभी भी 23 चिकित्सकों की जरूरत है।
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यहां पर आने वाले मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त बंदोबस्त नहीं है। मरीजों की लाइनें लंबी लगी रहती हैं, जबकि उनके बैठने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए सिविल अस्पताल में लिफ्ट लगाई गई थी, लेकिन यह लिफ्ट कुछ दिन चलने के बाद बंद पड़ी है।

गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सीढ़ियों के जरिये ही वार्ड तक पहुंचना पड़ता है। कूलर की व्यवस्था हर वार्ड में नहीं हैं, जिससे तेज गर्मियों में परेशानी होती है।
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अंबाला कैंट सिविल अस्पताल
 अंबाला कैंट के सिविल अस्पताल में मरीजों की परेशानियां कम नहीं हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों को घंटों लाइनों में लगने के बाद डॉक्टर के पास भेजा जाता है। तेज गर्मी में सिर्फ पंखों के सहारे गर्म हवाओं के बीच मरीज इंतजार करते हैं। इनके बैठने के लिए जो भी व्यवस्था है, वह नाकाफी है।

पीने के पानी की बात करें, तो प्रसूति विभाग में ही ठंडा पानी उपलब्ध है, जबकि अन्य नहीं। ओपीडी एरिया या फिर इमरजेंसी में बैठने की व्यवस्था है, अन्य कहीं पर बैठने का इंतजाम नहीं है। मरीजों व उनके तीमारदारों को बरामदे में बैठकर ही इंतजार करना पड़ता है। जनरल व मेडिकल वार्ड में सिर्फ पंखों का सहारा है, जबकि कूलर तो हैं ही नहीं।
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यह कहते हैं मरीज व तीमारदार
 अंबाला कैंट सिविल अस्पताल में मौजूद तीमारदारों में मनीष गुप्ता, रोशन लाल, हरजीत सिंह, मदन लाल, दयाल गुप्ता का कहना है कि मरीज को एक दिन के लिए दाखिल किया था, जिसके बाद तो रेगुलर चेकअप के लिए कहा गया।

रेगुलर चेकअप के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि मरीज को तो बरामदे में बिठाकर खुद लाइन में लगते हैं और नंबर आने पर ही मरीज को बुलाते हैं, ताकि उसे कोई दिक्कत न हो।
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 मरीजों की सुविधाओं के लिए समय-समय पर इंतजाम किया जाता है। कोशिश रहती है कि मरीज को कोई परेशानी न हो। मरीजों की लंबी लाइनों की बात करें, तो डॉक्टरों की कमी के कारण ऐसा है, जब चिकित्सकों की कमी दूर होगी, तो मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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