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Ambala News: 28 एसी लगवाने के बाद भुगतान न करने पर लाडवा आयुष्मान अस्पताल की संचालिका नामजद

Fri, 12 Dec 2025 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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मुलाना। आयुष्मान अस्पताल लाडवा की संचालिका द्वारा 28 एसी लगवाने के बाद 2 लाख 87 हजार 450 रुपये का भुगतान न करने का मामला सामने आया है। पीड़ित दुकानदार ने आरोप लगाया है कि बार-बार पैसे मांगने पर भी नहीं दिए। बाकायदा थाने में भी जल्द भुगतान की बात बोलकर नहीं किया गया। मुलाना थाना पुलिस ने धीन गांव निवासी मुकेश कुमार की तहरीर पर आयुष्मान अस्पताल लाडवा की संचालिका संगीता देवी व दोसड़का प्रीत इलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक प्रीतम सिंह पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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मुलाना थाना पुलिस को दी तहरीर में धीन गांव निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि उनकी मुकेश रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनर्स के नाम से दोसड़का सिरसगढ़ चौक पर दुकान है। अप्रैल 2024 में आयुष्मान अस्पताल लाडवा की संचालिका संगीता देवी अपने अस्पताल के लिए 28 एसी खरीदने के लिए दोसड़का स्थित प्रीत इलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक प्रीतम सिंह के पास आई थीं। अगले दिन प्रीतम सिंह मुझे अपने साथ कार में लेकर लाडवा स्थित आयुष्मान अस्पताल पहुंचे।
वहां संचालिका संगीता देवी ने सभी 28 एसी लगाने की बात की। उन्हें बताया गया था कि अस्पताल की इमारत कई मंजिल की होने के कारण तांबे की पाइपिंग व बिजली की वायरिंग का खर्च सामान्य एसी की तुलना में अधिक आएगा। पीड़ित ने बताया कि आरोपी संगीता देवी ने कहा था कि आप अच्छा सामान लगाओ, जितना भी खर्च होगा, मैं आपको पूरा भुगतान कर दूंगी। काम होने के बाद 28 एसी, तांबे की पाइप, बिजली की तारों व लेबर का कुल 2 लाख 87 हजार 450 का बिल बनाकर प्रीतम सिंह को दे दिया था। उसी समय प्रीतम सिंह ने संगीता देवी से फोन पर बात की और मुझे भरोसा दिलाया कि कुछ दिनों में पूरा भुगतान मिल जाएगा। परंतु आज तक मुझे कोई भुगतान नहीं मिला।
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थाने में भुगतान का दिया था आश्वासन, फिर भी नहीं किया

पीड़ित मुकेश ने कहा कि लगभग 15 माह तक बार-बार मांगने के बावजूद उन्होंने टालमटोल की। इसके बाद 25 जून 2025 को पुलिस थाना मुलाना में संगीता देवी और प्रीतम सिंह के विरुद्ध धोखाधड़ी की शिकायत दी थी। जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने 26 जून को थाने बुलाया, जहां दोनों पक्ष मौजूद थे। उस समय प्रीतम सिंह ने कहा कि संगीता देवी 30 जून को भुगतान कर देंगी, परंतु वह नहीं आईं। बाद में 9 जुलाई को वह फिर आईं व 20 सितंबर तक पूरा भुगतान करने का 100 रुपये के शपथ पत्र (नोटरीकृत) के माध्यम से लिखित आश्वासन दिया, जिसकी प्रति पुलिस को व मुझे दी गई थी। फिर भी कोई भुगतान नहीं हुआ।
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