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Ambala News: कारसेवकों का सम्मान, 1008 दीपों से श्रीराम का स्वागत

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अंबाला। छावनी के हिल रोड स्थित श्री सनातन धर्म सभा के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद ने सनातन धर्म मंदिर परिसर में श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया। इस दौरान सबसे पहले संकीर्तन हुआ। महिलाओं ने राम भजन गाए और नृत्य किया।
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श्री सनातन धर्म सभा की ओर से मंदिर परिवार में एलईडी स्क्रीन लगाई थी। इस पर अयोध्या के श्रीराम मंदिर से प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सीधा प्रसारित हुआ। इस दौरान लोगों ने कई बार जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके बाद 1990 में छावनी से जो भक्त अयोध्या में कार सेवा के लिए गए थे। उन कार सेवकों और उनके परिजन का सनातन धर्म सभा ने स्वागत किया।
इस दौरान श्री सनातन धर्म सभा के प्रधान प्रोफेसर ताराचंद गुप्ता, महासचिव सुधीर बिंदलस, उप प्रधान संदीप अग्रवाल और हरियाणा प्रांत के मठ मंदिर सह प्रमुख रमेश जोशी, बजरंग दल से जिला सह संयोजक यश प्रकाश, विहिप से सह उपाध्यक्ष भीम सिंह राणा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से विभाग प्रचारक सुंदर लाल, बाल कार्य प्रमुख भुवनेश ने 23 कारसेवक और उनके परिजनों को सम्मानित किया। दोपहर तीन बजे सुंदरकांड पाठ किया। इसके बाद शाम को मंदिर परिसर में 1008 दीप प्रज्वलित किए और आतिशबाजी की। यह उत्सव दीपावली की तरह मनाया। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष अशोक सिंघल, सचिन, संजय गुप्ता, संजय मल्होत्रा, राजेश चोपड़ा, राजेश गुप्ता और सुशील अग्रवाल मौजूद रहे।
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कारसेवा करने गए थे अयोध्या : अचलेस
23 अक्तूबर 1990 को वे 25 कारसेवकों को ऊंचाहार एक्सप्रेस से लेकर अयोध्या गए। दिल्ली और दिल्ली से जैसे ही उत्तर प्रदेश में दाखिल हुए तो सादी वर्दी में खड़े पुलिसकर्मियों ने उन्हें उतार दिया। उनके पहुंचते ही सादी वर्दी में खड़े पुलिसकर्मियों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए तो जवाब में जयकारे लगाए। इसी को देख पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। इस दौरान कुछ कारसेवक तो पकड़ लिया मगर वह अपने कुछ साथियों के साथ लखनऊ आउटर पर पहुंचे, जहां उन्हें उतार लिया और अस्थायी जेल में ले गए। इसके बाद विवादित ढांचा गिराया। तीन नवंबर 1990 को उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद अयोध्या दर्शन कर वह वापस आ गए थे। आज वह सम्मान पाकर बहुत खुश हैं कि रामकाम में उनकी भी आहुति लगी।

फोटो- 67
ट्रेन चालक ने की थी मदद : योगेश
कारसेवक योगश चोपड़ा ने बताया कि वर्ष 1990 में मेरी उम्र 26 वर्ष की थी। तब हरगोलाल धर्मशाला में अलग-अलग टोली बनाकर अयोध्या भेजा जा रहा था। उन्हें भी एक टोली में अयोध्या भेजा गया। अंबाला से जब वह कानपुर तक पहुंचे तो पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद ट्रेन के चालक ने मदद की और उन्हें कानपुर स्टेशन आने से पहले ही आउटर पर एक गांव के पास उतार दिया। इस दौरान सभी कारसेवक उतर गए। इसके बाद जैसे तैसे सरयू नदी तक पहुंच गए। यहां नदी के ऊपर बने पुल पर सीआरपीएफ के जवान तैनात थे। ऐसे में नदी किनारे से गांववासियों के पास सो गए। इसके बाद पुलिस ने पकड़ लिया था और पुलिस ने लाठियां बरसाई थी। इसके बाद पुलिस ने लखनऊ स्टेशन पर छोड़ दिया था जहां से वह वापस अंबाला आ गए थे।
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