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Ambala News: शहर और छावनी सीट पर जाट चेहरों को चौधर की आस

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वैभव शर्मा
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अंबाला सिटी। अंबाला जिला की चार विधानसभा सीटों में कुल 39 उम्मीदवार इस बार चुनावी मैदान में हैं। मगर रोचक मुकाबला अंबाला सिटी और अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र में बना है।
इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अब तक बने विधायकों का जातीय गणित देखें तो अंबाला कैंट विधानसभा सीट पर पंजाबी या वैश्य वर्ग को तो अंबाला सिटी सीट पर वैश्य और ब्राह्मण उम्मीदवार को जनता ने विधायक बनाकर भेजा है।
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इस बार इन दोनों सीटों पर जाट उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर देता हुआ दिखा जा रहा है। अंबाला सिटी से भाजपा ने असीम गोयल को मैदान में उतारा है जोकि वैश्य समाज से आते हैं तो वहीं अंबाला कैंट सीट पर भाजपा ने अनिल विज को टिकट दिया है जो पंजाबी समाज से आते हैं। जबकि इन दोनों प्रत्याशियों के सामने इस बार कैंट में चित्रा सरवारा तो सिटी सीट पर कांग्रेस के टिकट पर निर्मल सिंह टक्कर दे रहे हैं। दोनों ही उम्मीदवार जाट समाज से ताल्लुक रखते हैं।
इसके साथ ही कैंट में विज के सामने कांग्रेस ने परविंदर सिंह परी को उतारा है वह भी पंजाबी समाज से आते हैं। कैंट सीट पर अन्य दलों में इनेलो गठबंधन ने ओंकार सिंह और आम आदमी पार्टी ने राज कौर पर दाव खेला है जोकि पंजाबी समाज से हैं। ऐसे में इस बार इन दोनों ही सीटों पर पंजाबी, वैश्य और जाट समाज से प्रत्याशियों के बीच चुनौती है।

कैंट से एक वार वैश्य तो 12 बार पंजाबी जीते

कैंट विधानसभा सीट पर वर्ष 1967 से लेकर आज तक कुल 13 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। इसमें 12 बार पंजाबी चेहरे को ही जनता ने चुना है। हालांकि वर्ष 2005 में कांग्रेस से देवेंद्र कुमार बंसल इकलौते ऐसे विधायक बने थे जोकि वैश्य समाज से आते हैं। यहां भाजपा हो या कांग्रेस सभी की पहली पसंद पंजाबी उम्मीदवार रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र शुरुआत से पंजाबी बहुल रहा है। इसलिए यहां पर क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय पार्टियों की पहली पसंद पंजाबी समाज से आने वाले उम्मीदवार रहे। यहां से देवराज आनंद, भगवान दास, हंसराज सूरी, सुषमा स्वराज, रामदास धमीजा, अनिल विज, बृज आनंद और देवेंद्र कुमार बंसल विधायक रहे हैं।
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ब्राह्मण और वैश्य समाज से भी आए विधायक

अंबाला सिटी विधानसभा सीट पर 13 बार चुनाव हुए हैं। जिसमें छह बार वैश्य समाज से, चार बार ब्राह्मण समाज से तो तीन बार पंजाबी समाज से आने वाले उम्मीदवार का लोगों ने अपना विधायक बनाया है। इसमें वर्ष 1967 से लेकर 1972 तक लगातार वैश्य समाज से आने वाले प्रतिनिधि फकीर चंद अग्रवाल एक बार व दो बार लेखवती जैन को जनता ने अपना विधायक चुना। इसके बाद वर्ष 1977 से लेकर 1987 तक पंजाबी समाज से लगातार तीन बार मास्टर शिव प्रसाद विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1991 में ब्राह्मण समाज से सुमेर चंद, फिर 1996 में वैश्य समाज से फकीर चंद अग्रवाल, वर्ष 2000 में ब्राह्मण समाज से वीना छिब्बर, वर्ष 2005 व 2009 में दो बार ब्राह्मण समाज से पंडित विनोद शर्मा, वर्ष 2014 व 2019 में वैश्य समाज से आने वाले असीम गोयल एमएलए चुने गए।
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