अंबाला। विद्यार्थियों को शिक्षक बनने के लिए छह वर्ष की पढ़ाई करने के जरूरत नहीं है। वह चार वर्ष में ही बीई और बीएड कर शिक्षक बन सकते हैं। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को ऐसा मौका दे रही है।
इसके तहत छावनी के जीएमएन कॉलेज में जल्द ही इंटीग्रेटिड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम शुरू होगा। इसमें पढ़कर विद्यार्थी चार वर्ष में ही शिक्षक बनने के योग्य हो जाएंगे। विद्यार्थियों को शिक्षक बनना है तो पहले शिक्षा में स्नातक की डिग्री लेनी पड़ती थी। इसके बाद वह बीएड की पढ़ाई करते तब वे शिक्षक बनने योग्य होते थे।
ये पढ़ाई करने में करीब छह वर्ष का समय लगता था। मगर नई शिक्षा नीति के आने के बाद इंटीग्रेटिड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम में दोनों डिग्रियों को जोड़कर एक कर दिया है। इससे विद्यार्थियों के दो साल बच रहे हैं।
दाखिले के लिए 100 सीटें तय
प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने बताया कि इंटीग्रेटिड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम नई शिक्षा नीति के आने के बाद से विश्वविद्यालय के स्तर पर चल रहे थे। अब इसे कॉलेज स्तर पर लाया जा रहा है। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन पिछले कुछ समय से जुटा था। नए सत्र से इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के दाखिले भी लेने शुरू कर देंगे। इस प्रोग्राम के लिए 50 सेकेंडरी में तो 50 सीटें मिडिल क्लास में तय की गई हैं। इस कोर्स को चलाने के लिए कॉलेज परिसर में अलग से 14 कक्षा कक्ष तैयार किए गए हैं। वहीं प्राध्यापक भी तय कर ली गई है। यह कोर्स शिक्षक बनने वाले विद्यार्थियों को एक नई राह खोलने का काम करेगा।
विदेशी समझौते से मिलेगा लाभ
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने बताया कि अच्छे शिक्षकों की विदेशों में कई मांग है। ऐसे में विद्यार्थियों को विदेशों में भी काम करने का मौका मिले इसके लिए कॉलेज ने मलेशिया की एमएस यूनिवर्सिटी से भी एमओयू किया है। इस समझौते से वहां से विद्यार्थी अंबाला में तो अंबाला के विद्यार्थी मलेशिया की पढ़ाने की शैली को समझ सकेंगे। इसके साथ ही कैंपस में लैंग्वेज लैब भी तैयार की गई है। इसकी मदद से अलग-अलग देशों की भाषा भी विद्यार्थी सीख सकते हैं।