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Ambala News: बीमा कंपनियों ने पीछे खींचे हाथ, साइंस कारोबारी परेशान

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साइंस उत्पाद। संवाद - फोटो : Samvad
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अंबाला। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालात ने अब स्थानीय व्यापार की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से साइंस और प्रयोगशाला उपकरणों के निर्यात से जुड़े कारोबारी इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर जहां शिपिंग कंपनियों ने भारी-भरकम वार सरचार्ज लगा दिया है। दूसरी ओर बीमा कंपनियों ने हाथ खींच लिए हैं।
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कारोबारियों का कहना है कि खाड़ी के देशों में विज्ञान और प्रयोगशाला के उत्पादों की भारी मांग रहती है, लेकिन मौजूदा संकट के कारण सामान भेजना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। शिपिंग लाइनों द्वारा लगाए गए वार सरचार्ज की वजह से माल भाड़े में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादों की लैंडिंग कॉस्ट काफी बढ़ गई है, इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो गई है।



बीमा कंपनियों ने खड़े किए हाथ

निर्यातकक आलोक सूद बताते हैं कि व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा और जोखिम की है। मौजूदा हालात को देखते हुए कोई भी इंश्योरेंस कंपनी खाड़ी देशों में जाने वाले सामान का बीमा करने को तैयार नहीं है। बिना बीमा के समुद्री रास्तों से लाखों का माल भेजना जोखिम भरा है, क्योंकि युद्ध की स्थिति में नुकसान की भरपाई का कोई रास्ता नहीं बचता।
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सप्लाई लगभग बंद, करोड़ों का नुकसान

अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्यूफेक्टचरर्स एसोसिएशन के महासचिव उमाकांत बताते हैं कि बीमा न मिलने और सरचार्ज की मार के कारण निर्यातकों ने फिलहाल खाड़ी देशों में अपनी सप्लाई को लगभग बंद कर दिया है। निर्यात ठप होने से न केवल करोड़ों रुपये के ऑर्डर फंस गए हैं, बल्कि फैक्टरियों में तैयार पड़ा माल भी डंप होने लगा है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में लेबोरेटरी उपकरण उद्योग को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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