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Ambala News: एसकेएम के संगठनों से चल रही अनौपचारिक बात

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अंबाला। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) से जुड़े किसान संगठनों का रुख मौजूदा समय में आंदोलन कर रहे किसान संगठनों की तरफ हो सकता है। इसके लिए किसान नेताओं की एसकेएम के कुछ नेताओं से अनौपचारिक रूप से वार्ता चल रही है। अब यह वार्ता के कामयाब होने पर निर्भर करेगा कि वह किसान आंदोलन-2 से जुड़कर किस प्रकार आगे बढ़ते हैं।
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किसान नेताओं ने किन संगठनों से उनकी बात चल रही है, इसकी जानकारी गोपनीय रखी है। मगर इतना तय है कि शंभू मोर्चे पर बैठे किसान नेता लगातार एसकेएम के नेताओं से संपर्क में हैं। किसानों की कोशिश है कि किसी प्रकार से आंदोलन को दोबारा से बड़े स्तर पर खड़ा किया जाए और अपनी मांगों को सरकार से हर हाल में मनवाया जाए।

गौरतलब है कि तीन कानूनों को रद्द करने जैसी मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा का गठन हुआ था। जिसमें देशभर के किसान संगठन शामिल थे। इसके बाद जब एमएसपी को लेकर दोबारा से फरवरी में किसान आंदोलन हुआ तो एसकेएम (गैर राजनैतिक) व किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले कुछ अन्य किसान संगठन आए। वहीं अब आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।
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फरवरी में औपचारिक रूप से हुई थी बात

किसान आंदोलन 13 फरवरी को पंजाब के शंभू पहुंचा था। इसी दौरान एसकेएम (गैर राजनीतिक) व किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं की संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों से औपचारिक रूप से बात हुई थी। पांच लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने इस वार्ता को आगे बढ़ाया था, मगर तब किसान नेता आंदोलन की राह न अपनाकर राजनीति के जरिए सरकार को बदलने की कोशिश में थे। जबकि मौजूदा समय में आंदोलन कर रहे किसान नेता राजनीति की राह पर न जाकर आंदोलन के जरिए अपनी मांग सरकार से मनवाना चाहते थे। यही कारण था कि दोनों किसान संगठनाें की राय अलग-अलग हो गई। इसके बाद कई किसान नेताओं के एक-दूसरे के खिलाफ आए बयानों ने संबंधों में खटास लाने का काम किया।

अब दोनों का एक ही मत

लोकसभा चुनाव में जब केंद्र में मौजूद भाजपा सरकार दोबारा से सत्ता में आ गई तो अब हालात बदल गए हैं। किसान नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि एसकेएम से जुडे़ किसान नेताओं की राय भी यही बन रही है कि आंदोलन से ही किसान अपनी बात मनवाएं। यही कारण है कि अंदरखाने किसान आंदोलन को बड़ा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हाल ही में किसान नेता राकेश टिकैत का बयान भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।
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