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मिक्सी इंडस्ट्री कलस्टर निर्माण में अड़ंगा, 49 लाख का टेंडर रद

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अंबाला। चार साल से क्लस्टर निर्माण से के लिए कसरत कर रहे मिक्सी उद्यमियों को झटका लगा है। उद्यमियों का आस थी कि क्लस्टर निर्माण से मिक्सी इंडस्ट्री को संजीवनी मिलेगी पर अब उसमें अड़ंगा अड़ गया है। क्लस्टर में बनने वाले कॉमन फेसिलिटी सेंटर के भवन निर्माण का टेंडर ही राह मुसीबत बन गया था। उद्योगपतियों के कड़े ऐतराज की वजह से सरकार ने 49 लाख के इस टेंडर को रद कर दिया है। रिटेंडर न होने की वजह से अब यह योजना लटकती दिख रही है।
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दरअसल राज्य सरकार द्वारा क्लस्टर को मंजूरी देने के बाद दम तोड़ती मिक्सी इंडस्ट्री में फिर से जान आने की उम्मीद बनी थी। इसके लिए मानकपुर रोड पर चार एकड़ जमीन भी उद्योगपतियों ने खरीद ली थी। फिर पेचीदा शर्तों के बावजूद जमीन की सीएलयू भी करवाई गई। संभावना थी कि क्लस्टर के जल्द निर्माण से दम तोड़ती इंडस्ट्री दोबारा से अपने पैरों पर खड़ी हो जाएगी। लेकिन सरकार की कई शर्तें उद्योगपतियों के लिए मुसीबत बन गई हैं। चार एकड़ जमीन 21 इंडस्ट्री स्थापित के लिए उद्योगपतियों को सीएलयू में ही तीन साल लग गए।
1.60 करोड़ के बजट को मिल चुकी है मंजूरी
क्लस्टर के लिए राज्य सरकार ने 1.60 करोड़ के बजट को मंजूरी दे रखी है। इसमें 30 लाख रुपये तो कॉमन फेसिलिटी सेंटर के भवन निर्माण पर खर्च होने हैं जबकि 1.30 करोड़ रुपये से ऑटोमेटिक मशीनरी की खरीद होनी है ताकि इंडस्ट्री को हाईटेक किया जा सके। कॉमन फेसिलिटी सेंटर के निर्माण के लिए पिछले दिनों ही सरकार ने टेंडर आमंत्रित किया था। मगर 30 लाख की बजाय ये टेंडर 49 लाख रुपये में निकाला गया। बचे 19 लाख रुपये उद्योगपतियों को देने थे। उन्होंने इतनी बड़ी रकम देने से इनकार कर दिया। साफ कहा कि 30 लाख रुपये की लागत से ही सेंटर का निर्माण होना चाहिए। उद्योगपतियों ने सरकार को यह कहा था कि 30 लाख रुपये में ही सेंटर का निर्माण करवाया जाए। सहमति के बाद बैंक में अकाउंट तक खुलवाया गया पर अभी तक सरकार ने इस खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया। इसी वजह से सेंटर का निर्माण नहीं हो पाया। यही नहीं कलस्टर में बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होने वाला करीब पौने दो करोड़ का फंड भी अपनी तक जारी नहीं हुआ।
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कभी 700 करोड़ से ज्यादा था सालाना कारोबार
देश को पहली मिक्सी देने वाले अंबाला में कभी मिक्सी इंडस्ट्री की छोटी बड़ी 300 से ज्यादा इंडस्ट्रीज थी। तब यहां सालाना कारोबार 700 करोड़ से ज्यादा का था। अब इंडस्ट्री में कुल 35-40 इंडस्ट्री ही बची हैं। सब्सिडी व दूसरी रियायतें मिलने की वजह से ज्यादातर इंडस्ट्री हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में शिफ्ट हो चुकी हैं।
मिक्सी इंडस्ट्री में आएगा बूम- अग्रवाल
क्लस्टर निर्माण से मिक्सी इंडस्ट्री को नई संजीवनी मिलेगी। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि इंडस्ट्री को मजबूती भी मिलेगी। सरकार ने सीएफसी के लिए टेंडर आमंत्रित किया था लेकिन बजट ज्यादा होने के कारण हमने उसे मंजूरी नहीं दी है। 30 लाख रुपये में बेहतर भवन बन सकता है।
-अजय अग्रवाल, प्रधान मिक्सी इंडस्ट्री एसो.।
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उद्योगपतियों के दर्द को जाने सरकार: आहुजा
निसंदेह क्लस्टर के निर्माण से इंडस्ट्री को फायदा होगा। अभी योजना को सिरे चढ़ने में कई दिक्कतें आ रही हैं। इंडस्ट्री को जिंदा करने के लिए सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। अभी टेंडर की नई मुसीबत हमारे सामने खड़ी हो गई है।
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-कुलदीप आहुजा, सचिव मिक्सी इंडस्ट्री एसो.
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