फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: कुत्तों के काटने की बढ़ रही घटनाएं, नगर निगम का कम हो रहा बजट

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला सिटी। कुत्तों की बढ़ती आबादी और कुत्तों के काटने के मामलों में इजाफे की समस्या शहर व छावनी में प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसको लेकर कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल दर साल नगर निगम का बजट कम होता जा रहा है। इस बार भी बजट में ऐसी ही स्थिति दिखाई दे रही है।
विज्ञापन

स्ट्रे डॉग्स की व्यवस्था को लेकर बजट कम कर दिया गया। डॉग बाइट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उसी हिसाब से स्ट्रे डॉग्स की व्यवस्था को लेकर नगर निगम का बजट साल दर साल कम होता जा रहा है। स्थिति यह है कि 2021-22 में नगर निगम ने एक करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया था। वहीं इसमें से 13 लाख 4 हजार 160 रुपये खर्च किए थे। इस बजट को 2022-23 में घटाकर 75 लाख रुपये कर दिया। स्थिति यह है कि इसमें से निगम ने एक भी रुपये खर्च नहीं किया है। इस बार बजट को और अधिक कम कर दिया है। लगातार कम हो रहे बजट को देखते हुए नगर निगम की व्यवस्था चरमराई हुई लग रही है।
दूसरी ओर, सुअरों की व्यवस्था को लेकर निगम ने न पिछले साल कोई प्रावधान रखा था और न ही इस बार कोई प्रस्तावित बजट तय किया है। इसके विपरीत गोवंश को लेकर नगर निगम थोड़ा सजग नजर आ रहा है। निगम ने बेसहारा गोवंश को पकड़ने के लिए दिए जाने वाले काॅन्ट्रेक्ट के लिए भी बजट में वृद्धि की है। साथ ही गोशाला निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। निगम ने बजट में बेसहारा गोवंश की व्यवस्था के लिए 2021-22 में पांच लाख रुपये निर्धारित किए थे। वहीं 2022-2023 के बजट में बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया था लेकिन निगम इसमें से केवल एक लाख 50 हजार रुपये ही खर्च कर सकता था। अब निगम ने बेसहारा गोवंश को पकड़ने वाले काॅन्ट्रेक्ट के लिए 91 लाख 80 हजार रुपये प्रस्तावित किए हैं। वहीं सुअरों को लेकर 2021-22 के बजट में पांच लाख रुपये रखा गया था।
विज्ञापन

पहले यह की गई थी व्यवस्था
स्ट्रे डॉग्स को लेकर नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया चलाई गई थी मगर कंपनी को भुगतान न होने के कारण काम रोक दिया गया। इस दौरान कंपनी की ओर से करीब पांच हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी करने के बारे में कहा जा रहा था मगर अब काम ठप है। दूसरी ओर, गोवंश को लेकर भी अभी कोई खास प्रक्रिया नहीं चल रही है क्योंकि नगर निगम की ओर से जिन गोशालाओं में गोवंश को छोड़ा जाता है वह अधिकतर फुल हैं। इस कारण गोशाला संचालक भी गोवंश लेने से मना कर रहे हैं। बेसहारा गोवंश को पकड़ने का कार्य भी पूरी तरह से रुका हुआ है। वहीं सुअरों को पकड़ने के लिए निगम ने काफी समय पहले अभियान चलाया था मगर यह अभियान भी पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।

हमने अधिकारियों को कहा है कि उस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए जिन्होंने कुत्तों की नसबंदी का कार्य किया है क्योंकि हजारों कुत्तों की नसबंदी होने के बाद भी कुत्तों की आबादी शहर से कम होने का नाम नहीं ले रही है। वहीं गोवंश की व्यवस्था को लेकर भी बार-बार अधिकारियों को अवगत करवा रहे हैं। इस संबंध में बैठक में भी मुद्दा उठाएंगे।
विज्ञापन

- राजेश मेहता, डिप्टी मेयर, नगर निगम।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें