अंबाला। ट्रेन में महिलाओं के लिए अकेले यात्रा करना अभी भी मुश्किल है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते सात माह में ट्रेन में अकेले सफर करने वाली 150 महिलाओं ने मदद की जरूरत पड़ी है। उन्होंने मदद के लिए रेलवे की हेल्पलाइन से संपर्क किया और अपनी पीड़ा को बताया, इसमें किसी महिला ने सीट पर कब्जे को लेकर शिकायत की तो किसी ने पुरुष यात्री द्वारा दुर्व्यवहार करने की शिकायत दी, वहीं कुछ ने ट्रेन में गुम हुए सामान को ढूंढ़ने के लिए मदद की गुहार लगाई। महिलाओं से जुड़ी इन समस्याओं का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। हालांकि महिलाओं की शिकायत मिलने पर आरपीएफ की मेरी सहेली टीम ने समस्या के समाधान के लिए उनसे संपर्क किया। उन्होंने ट्रेन में पहुंचकर महिला यात्रियों से बात की और उनकी परेशानी को दूर किया।
केस 1
बेगमपुरा में सीट पर कब्जा
ट्रेन नंबर 12,238 में सफर करने वाली महिला ने रेलवे के नियंत्रण कक्ष पर संदेश दिया कि ट्रेन में काफी भीड़ है और उसकी सीट स्लीपर श्रेणी के कोच नंबर एस-7 में है, लेकिन सीट पर अंजान लोग बैठे हैं जो सीट को खाली नहीं कर रहे, जैसे ही यह सूचना रेलवे के नियंत्रण कक्ष से मेरी सहेली टीम के पास पहुंची तो ट्रेन के अंबाला पहुंचते ही कोच में घुसकर आरपीएफ की महिला टीम ने सीट पर बैठे यात्रियों को खदेड़ दिया, इसके बाद महिला यात्री को सीट पर बैठाया गया और उन्हें कहा गया कि बीच रास्ते सफर के दौरान अगर दोबारा परेशानी हो तो वो उनके मोबाइल नंबर पर जानकारी दे सकती हैं।
केस 2
दुर्व्यवहार की शिकायत
ट्रेन नंबर 11077 झेलम एक्सप्रेस में सफर करने वाली महिला यात्री ने रेलवे के नियंत्रण कक्ष में शिकायत दी कि कुछ पुरुष यात्री अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, इससे वो असहज महसूस कर रही हैं। कंट्रोल से संदेश मिलने के बाद आरपीएफ की मेरी सहेली टीम ने एसी कोच में पहुंचकर महिला यात्री से बात की और पुरुष यात्रियों को चेतावनी दी कि वो अपने व्यवहार को बदलें, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, इसके बाद पुरुष यात्रियों ने महिला से माफी मांगी तो मामला शांत हो गया।
केस 3
गुम हुआ बैग
लखनऊ से चंडीगढ़ तक ट्रेन नंबर 12232 में सफर कर रही महिला यात्री ने सामान के गुम होने की शिकायत दी। महिला यात्री ने बताया कि वो पति को लेकर पीजीआई जा रहीं थीं, लेकिन सफर के दौरान उनका दवाइयों सहित अन्य दस्तावेज से जुड़ा बैग गुम हो गया। ट्रेन के अंबाला पहुंचते ही आरपीएफ टीम ने जब कोच को खंगाला तो वो बैग एक दूसरी सीट पर पड़ा हुआ मिला, जिसे बाद में महिला यात्री के सुपुर्द कर दिया गया।
ट्रेन में सफर करने वाली अकेली महिला यात्रियों को यह ही सलाह दी जाती है कि अगर उन्हें सफर में किसी तरह की परेशानी हो तो वह हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। समस्या समाधान के बाद मेरी सहेली टीम पीड़िताओं का मनोबल भी बढ़ाती हैं। इस टीम में महिला कर्मचारी ही होती हैं ताकि महिलाएं अपनी पीड़ा सहजता से बता सकें।
- रविंदर सिंह, प्रभारी आरपीएफ अंबाला।