कराधान की 10 वर्षीय सलौनी की मौत के मामले को अब हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने अंबाला के एसपी और बिजली निगम से इस बारे में रिपोर्ट तलब की है। इतना ही नहीं बच्ची की मौत पर उसके परिजनों को क्या मुआवजा दिया गया है यह भी आयोग ने पूछा है। अलबत्ता इस मामले में सस्पेंड किए गए जेई ईश्वर की दिक्कतें अभी थमती नजर नहीं आ रही हैं। हालांकि सस्पेंड जेई ने इस मामले में पीडब्ल्यूडी पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
बता दें कि 30 मई को कराधान गांव में रहने वाले 10 वर्षीय मासूम सरिया हाथ में लेकर घूम रही थी। इसी दौरान घर के नजदीक खंभे पर बिजली का पोल इतना नीचे था कि मासूम के हाथ का सरिया खेलते-खेलते खंभे से जा टकराया। इस तरह मासूम का शरीर बुरी तरह से करंट में झुलस गया था। करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा झुलने के बाद उसे परिजन छावनी नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जहां से उसे चंडीगढ़ 32 रेफर कर दिया गया और वहां बच्ची ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।
इंसाफ के लिए भटकता रहा था परिवार : बच्ची को खोने के बाद जब बच्ची के पिता ने पुलिस में केस दर्ज करवाने की गुहार लगाई तो पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी। लेकिन बच्ची के परिजनों को चंडीगढ़ से बिना पोस्टमार्टम करवाए ही यह कहकर निकाल दिया गया था कि कोरोना का केस आ गया है। इससे खतरा हो सकता है। इस तरह परिजन बिना पोस्टमार्टम के अंबाला आ गए थे जिन्हें बाद में शव को लेकर दोबारा चंडीगढ़ जाना पड़ा और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लानी पड़ी। इसके बाद केस दर्ज किया गया था।
किस पर होगी कार्रवाई नहीं पता : बता दें कि पुलिस ने इस मामले में बिजली निगम पर लापरवाही का केस दर्ज किया है? लेकिन बिजली निगम में कौन? यह किसी को नहीं पता। अलबत्ता इस मामले को हमेशा की तरह रफा-दफा कर दिया जाने की योजना है।