अंबाला सिटी। शहर के सिंघावाला रोड पर शिव शक्ति सेवा मंडल द्वारा आयोजित करवाई जा रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन डाॅ. स्वामी अनुभवानंद गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मानव शरीर मथुरा है और हृदय गोकुल।
हृदय रूपी गोकुल में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को स्थान देना चाहिए। जब जीव अपने हृदय में गोकुल के भाव धारण कर लेता है तो उसके काम, मद, लोभ, मोह, मत्सर आदि स्वयं नष्ट हो जाते हैं। कथा में महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि प्रेम हो या द्वेष, लोभ हो या फिर मोह किसी भी भावना से यदि प्रभु से संबंध जुड़ जाए तो भगवान उसे अपनी शरण में ले लेते हैं।
कृष्ण जन्म के बाद कंस को अपनी मृत्यु का भय सताने लगा और वह उन्हें पागलों की तरह ढूंढ रहा था। एक दिन उसने पूतना नाम की राक्षसी को गोकुल धाम में भेज दिया। पूतना ने अपने स्तन में विष लगाकर भगवान श्रीकृष्ण को अपनी गोद में ले लिया और उन्हें स्तनपान कराने लगी। वह बालकृष्ण को लेकर आकाश मार्ग से उड़ने लगी। धीरे-धीरे प्रभु जब दुग्ध के साथ उसके प्राणों को भी पीने लगे तो चीखने-चिल्लाने लगी।
प्रभु ने मुष्टिका प्रहार कर उसका अंत कर दिया। उन्होंने कहा कि मन की चोरी ही माखन चोरी है। मात्र डेढ़ वर्ष की आयु में लल्ला ने माखन चोरी करना शुरू कर दिया। किसी का माखन चुरा लेते तो कभी साथियों संग मिलकर गोपियों की मटकियां तोड़ देते थे। लेकिन इस पर सभी गोपियां नाराज न होकर उनकी इस लीला का खूब आनंद लेती थी। गोवर्धन पूजा के प्रसंग पर व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि गोवर्धन लीला ज्ञान और भक्ति को बढ़ाती है। बाल कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन को धारण कर अभिमानी इंद्र के अभिमान को चूर करके संदेश दिया कि प्रकृति से प्रेम करो। इस अवसर पर रोहित शर्मा ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भजन माखन खा गया बिहारी मेरा हस-हस व छटा तेरी तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज गाया तो वहां मौजूद श्रोता मस्ती में झूम उठे।