अंबाला सिटी। सेक्टर सात में पानी की निकासी के लिए विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इसका पटाक्षेप सोमवार को हाईकोर्ट में हुआ। सेक्टर सात के निवासियों की ओर से हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना याचिका दायर की थी।
इसमें सेक्टरवासियाें तर्क दिया था कि 10 महीने बीतने पर भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम और डीटीपी सहित अन्य विभागों ने पानी की निकासी के लिए कोई डिस्पोजल नहीं बनाया। इस अवमानना के मामले में हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति निधि गुप्ता ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर सोमवार को सुनवाई के लिए बुलाया था।
इस दौरान हाईकोर्ट में एचएसवीपी, नगर निगम, डीटीपी और अन्य विभागों के अधिकारी अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से पेश हुए। सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा तो अधिकारियों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट से समय देने की गुहार लगाई। इसके बाद कोर्ट ने 30 जुलाई तक मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
जलभराव और दूसरी समस्याएं लेकर गए थे कोर्ट
सेक्टर सात के निवासी ओपी विज और अखिलेश चोपड़ा ने जुलाई 2024 में हाईकोर्ट का रुख किया था। इस दौरान उन्होंने याचिका दायर करते हुए बताया था कि सेक्टर सात के पीछे 32.69 एकड़ जगह डिस्पोजल के लिए प्रस्तावित है। जबकि 1979 से लेकर वर्तमान तक अस्थाई तौर पर पानी का निस्तारण किया जा रहा है। इस मामले में याचिकाकर्ता ने नया डिस्पोजल बनाने की गुहार लगाई थी। इसमें यह भी शामिल था कि लोगों के घरों में जो पानी आता उसका स्थाई समाधान हो। इसके साथ ही एचएसवीपी सीवरेज वेस्ट को रेन वाटर डिस्पोजल में डाला जा रहा था। इस याचिका में एचएसवीपी, नगर निगम, डीटीपी सहित अन्य विभागों को पक्षकार बनाया था।
विभाग ने समस्या हल के लिए दिया था शपथपत्र
हाईकोर्ट में जब मामले की सुनवाई चली तो एचएसवीपी के तत्कालीन एक्सईएन योगेश्वर ने कोर्ट को शपथ पत्र दिया था। इसमें बताया था कि अनियोजित अधिगृहीत भूमि 500 वर्ग मीटर में एक रेन वाटर डिस्पोजल बनाने की योजना है। वहीं मकान नंबर 340 से लेकर विजय नगर ड्रेन तक एक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। विभाग ने यह कार्य तो कर दिया मगर 500 वर्ग मीटर जो रेन वाटर डिस्पोजल बनाने का वादा किया था वह नहीं पूरा किया। ऐसे में 10 माह बीतने पर सेक्टर सात निवासी ओपी विज ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।