नारायणगढ़। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बागवानी अनुसंधान केंद्र चांदसौली में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार बुधवार को निरीक्षण के लिए पहुंचे। यहां पर उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
उन्होंने कहा कि इस अनुसंधान केंद्र में मुख्य रूप से आडू, नाशपाती, बेर, सेब, आम, लीची आदि फलों और धनिया, मूली, मैथी, और पालक आदि सब्जियों की फसलों पर जोर दे रहा है। केंद्र अनुसंधान करके प्रौद्योगिकी को उत्पन्न करने ओर अच्छा बीज प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में किसान भाइयों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीजों के साथ-साथ पौधों की सामग्री भी प्रदान की जाएगी।
शुरुआत में 30 सीटों से शुरू होगा कॉलेज
कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि बागवानी महाविद्यालय में शुरू में बीएससी (ऑनर्स) बागवानी में 30 सीट निर्धारित की जाएंगी। इसके बाद अगर जरूरत लगी तो आईसीएआर के दिशा निर्देशानुसार सीटें बढ़ाई जा सकती हैं। कॉलेज की स्थापना से क्षेत्र के युवाओं को अपनी वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद बागवानी विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। भले ही वे चिकित्सा या गैर चिकित्सा पृष्टभूमि से आते हो। स्नातक बागवानी में बैचलर ऑफ ऑनर्स अर्जित करेंगे।
13 करोड़ में बना है केंद्र
यह केंद्र 13 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ है। प्रशासनिक भवन में क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय, सम्मेलन कक्ष, प्रशासन कार्यालय, प्रदर्शनी हॉल, स्टाफ रूम, 10 वैज्ञानिक कक्ष, तीन सामान्य प्रयोजन कक्ष, चार प्रयोगशालाएं, दो व्याख्यान कक्ष, स्मार्ट क्लास रूम, डिस्पेंसरी, कंप्यूटर लैब, मनोरंजन कक्ष, कैफेटेरिया, ओपन एयर थियेटर, गेस्ट हाउस शामिल है।
युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर
महाविद्यालय शुरू होने के बाद यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी बेहतर विशेषज्ञ बनकर बाहर निकलेंगे। जो अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर बागवानी की खेती करने वाले किसानों को बागवानी से संबंधित नवीनतम जानकारी देंगे, जिससे उनके जीवन में उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाने से बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट मानव संसाधन का विकास होगा।इस दौरान कुलपति ग्रामीणों के बीच पहुंचे।ग्रामीणों ने कुलपति डॉ सुरेश मल्होत्रा को स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया।