अंबाला। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए लोगों को जल्द अब दूसरे जिलों में चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। जल्द ही अंबाला का अपना इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग और रिसर्च सेंटर शुरू होगा। वैसे इस सेंटर को कुछ वर्ष पहले ही सुचारू हो जाना चाहिए था।
इसके लिए अधिकारियों ने नगर परिषद की घसीटपुर में स्थित 12 एकड़ जमीन को फाइनल कर दिया था। मगर जमीन का मामला कोर्ट में चले जाने से इस सेंटर पर फाइल आगे ही नहीं बढ़ सकी। अब कोर्ट में इस जमीन का मामला अंतिम स्तर पर है। ऐसे में आस है कि अगर नगर परिषद के पक्ष में केस हुआ तो इस सेंटर का निर्माण हो सकेगा। मौजूदा समय में लोगों को हेवी लाइसेंस बनाने के लिए कैथल और करनाल की दौड़ लगानी पड़ती है। आरटीए सचिव सुशील कुमार ने बताया कि चयनित जमीन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जल्द इसपर फैसला आ सकता है।
ड्राइविंग स्कूल खोलने के दिए निर्देश
परिवहन मंत्री अनिल विज ने प्रदेश के हर जिले में ड्राइविंग स्कूल स्थापित करने के लिए निर्देश दिए हैं, जिससे कि लोगों विशेषकर युवाओं को वाहन चलाने के सभी नियम और तकनीक समझ में आ सके। इससे एक जागरूक और नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों की ओर से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी। स्थानीय स्तर पर भी मंत्री विज ने तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं।
सेंटर में दी जाती है ट्रेनिंग
हैवी लाइसेंस रोड सेफ्टी को-ऑर्डिनेटर ने बताया कि हेवी लाइसेंस बनने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में बीस दिन का कोर्स 34 घंटों में पूरा कराया जाता है। शुरुआत में पहले और दूसरे दिन आठ-आठ घंटे की क्लास लगाई जाएगी। इसके बाद रोजाना 18 दिन तक घंटे की क्लास लगाई जाएगी। इस क्लास के दौरान तीन दिन सिमेलेटर यानी कंप्यूटर मशीन पर ट्रेनिंग कराई जाती है और 15 दिन का प्रैक्टिकल कराया जाता है। इन संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर अच्छे चालक निकलते हैं।