नई आबादी के बाशिंदे बुधवार को दिन भर अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ते रहे। उनके चेहरों पर बेघर होने की दहशत साफ दिखाई दी। सारा दिन बैठकों का दौर चलता रहा, जबकि निगम और रेलवे अधिकारी अपनी-अपनी कार्रवाई में जुटे रहे। राहत की बात यह रही कि अधिकारियों ने इन लोगों का मांगपत्र ले लिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो वे जमीन की पैमाइश ही नहीं होेने देंगे। बुधवार सुबह ही नई आबादी के बाशिंदे एक जगह जमा हो गए। इन सभी को डर था कि नोटिस की तिथि समाप्त होने के बाद रेलवे यहां पर कार्रवाई करेगा। रेलवे और निगम के कुछ अधिकारी भी नई आबादी क्षेत्र में पहुंच गए। हालांकि कार्रवाई तो नहीं हुई, लेकिन अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों का मांगपत्र जरूर ले लिया। इस दौरान लोग अधिकारियों के आगे हाथ जोड़कर बेघर न करने की गुहार लगाते रहे।
ये मांगें रखीं
* जिस परिवार का मकान तोड़ा जाए, उस परिवार को उतने ही एरिया का मकान दिया जाए।
* अधिगृहीत के बाद जो जमीन बचे उसे उसके मालिक को दिया जाए।
* जिस परिवार की जमीन अधिगृहीत की जाए, उस परिवार से एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
* जिस दिन मांगें पूरी होंगी, उसी दिन पैमाइश शुरू करवाई जाएगी।
यह कहते हैं लोग
स्थानीय निवासी सुरेश कुमार, महेंद्र सिंह, ओमप्रकाश, शगुन चंद, विनोद कुमार, शेर सिंह, बनारसी दास, सोमनाथ, सुनील सैणी, राधेश्याम, प्रेमवती, भारत दास शाक्य, कुंदन लाल ने बताया कि अंग्रेजों ने हमें यहां पर बसाया था। अब रेलवे फ्रेट कारीडोर के लिए जमीन अधिगृहीत करना चाहता है, लेकिन उनके पुनर्वास की बात कोई नहीं कर रहा है। अगर उनको बेघर कर दिया गया तो वे कहां जाएंगे।