राफेल आने से वायुसेना की ताकत में कई गुणा इजाफा हो जाएगा। अंबाला एयरफोर्स की सुरक्षा में जगह-जगह छेद हैं। बलदेव नगर का बहुत सा एरिया एयरफोर्स स्टेशन की दीवार के साथ सटा है। इस पर आसानी से चढ़कर एयरफोर्स पर निगरानी की जा सकती है। इतना ही नहीं एयरफोर्स स्टेशन की दीवार से करीब 2 फुट की दूरी पर ही बलदेव नगर के मकान भी बने हुए हैं। इनसे भी एयरफोर्स के जहाजों का खतरा है।
बता दें कि लापरवाही के चलते 27 जून 2019 को रनवे से उड़ान भरते हुए पक्षी की चपेट में आने से एयरफोर्स का जगुआर क्षतिग्रस्त हो गया था। आज तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका। जगुआर के क्षतिग्रस्त होने के बाद एयरफोर्स के अधिकारियों ने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर अवैध निर्माण को हटाने की मांग की थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
100 मीटर दायरे में नहीं हो सकता निर्माण
डिफेंस एक्ट 1903 के तहत एयरफोर्स स्टेशन के 100 मीटर दायरे में कुछ भी निर्माण नहीं किया जा सकता। मकान से एयरफोर्स के जहाजों को खतरा है। क्योंकि मकानों पर पक्षी आ जाते हैं। अकसर घरों की छतों पर इनके लिए दाना डाल दिया जाता है या फिर वेस्ट खाना भी डाल दिया जाता है जोकि एयरफोर्स के जहाजों के लिए खतरा है। अंबाला में 100 मीटर दो दूर की बात महज 1 मीटर दायरे में ही 300 से ज्यादा मकान बने हुए हैं जबकि 100 मीटर दायरे में करीब एक हजार मकान हैं।
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हाईकोर्ट भी कर चुका है सख्त टिप्पणी
मोहाली और फरीदाबाद एयरफोर्स स्टेशन से सटे मकानों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। इस केस में रक्षा मंत्रालय ने हाईकोर्ट को दिए हलफनामे में कहा था कि 100 मीटर दायरे में बने मकानों को हटाने के लिए डीसी अधिकृत होंगे। लेकिन इसके बावजूद अंबाला में इन आदेशों का कोई असर नहीं हुआ।
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सेना नगर की ट्रांसपोर्ट भी एयरफोर्स के लिए खतरनाक
बता दें कि सेना नगर की ट्रांसपोर्टर एयरफोर्स स्टेशन की दीवार के साथ सटी है। कुछ ट्रांसपोर्टर ने तो एयरफोर्स स्टेशन की दीवार पर ही अवैध निर्माण कर लिया है। एयरफोर्स स्टेशन की दीवार से इनके भवन की दीवार की ऊंचाई भी ज्यादा है। इस पर खड़े होकर आसानी से एयरफोर्स की गतिविधियां ट्रेस की जा सकती हैं। इतना ही नहीं यह ट्रांसपोर्टर न केवल हरियाणा बल्कि जम्मू, दिल्ली, हिमाचल व अन्य राज्यों के ट्रांसपोर्टर यहां आते हैं।