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13 महीनों पर भारी रही अकेले मई में कोरोना महामारी

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अंबाला। लॉकडाउन के दौरान कोरोना महामारी में रिकवरी दर सुधार के सरकारी आंकड़े पेश कर अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग अपनी पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन हकीकत इससे ज्यादा भयावह है। कोरोना से मौत की बात करें तो जितनी मौत पिछले 13 महीनों में हुई उससे ज्यादा औसतन मौत मई के 18 दिनों में हो चुकी हैं। अब तक 172 लोगों की जान जा चुकी है जबकि अभी महीने के 12 दिन शेष हैं। मई में औसतन हर दिन नौ लोगों से ज्यादा की जान गईं।
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आंकड़े बता रहे हैं कि 30 अप्रैल से 18 मई तक रिकवरी रेट यानी कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में करीब 7 फीसद का सुधार हुआ है लेकिन अस्पताल में भर्ती होने और उपचार के दौरान दम तोड़ने वाले कोरोना संक्रमित की संख्या में उससे भी ज्यादा तेजी से इजाफा हुआ है। जिलेभर में 13 महीनों में कुल मौत 413 हुई और कुल संक्रमित 18 मई तक 27860 हैं।
अलबत्ता कुल मृत्यु दर 1.48 फीसदी हो गई। मई यानी लॉकडाउन के 18 दिनों में मृत्यु दर 2.45 फीसदी होने से कुल मृत्यु दर में 0.34 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया, यह चिंतनीय है। इस तरह अभी तक पूरे मई माह में मृत्यु दर पिछले एक साल से करीब दोगुनी चल रही है।
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लॉकडाउन से पहले जिले में कोरोना की यह थी स्थिति
30 अप्रैल को जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों का कुल रिकवरी रेट 82.65 प्रतिशत और पॉजिटिव रेट करीब 6.65 प्रतिशत था। मार्च 2020 से लेकर 30 अप्रैल तक जिले में कुल 241 मौत हुई थी। 30 अप्रैल तक जिले में 380 मरीज विभिन्न अस्पतालों जिनमें से करीब 100 मरीज जिले के सरकारी अस्पतालों में भर्ती थे।
लॉकडाउन के बाद से 18 मई तक की स्थिति
लॉकडाउन की बात करें तो दो मई से लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई थी। मई महीने में 18 मई तक कुल 46145 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें से 3218 की रिपोर्ट आना बाकी है। इस तरह 42837 सैंपल में से 7003 सैंपल कोरोना संक्रमित मिले। इसी अवधि में 7842 मरीज कोरोना से मुक्त भी हुए। इसी कारण रिकवरी रेट 82.65 से बढ़कर 90.02 प्रतिशत हो गया। मई के 18 दिनों की इस अवधि में 172 मौत भी हुई। जोकि मई में मिले कुल संक्रमितों में से 2.45 फीसद रही। कुल 13 महीनों में 18 मई तक 365019 सैंपल जांचे गए। इनमें से 27860 संक्रमित मिले यानी कुल 7.63 प्रतिशत सैंपल संक्रमित। लॉकडाउन के शुरुआती 18 दिनों में 42837 में से 6825 संक्रमित मिले यानी 15.93 फीसदी सैंपल संक्रमित मिल रहे हैं। इस तरह मई में संक्रमण की रफ्तार पूरे साल से दोगुनी रही।
सावधान! हल्के में न लें कोरोना
रिकवरी रेट सुधरने का मतलब यह नहीं है कि आप लापरवाह हो जाएं। अभी बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। आंकड़ों की बात करें तो जिस तेज गति से जिला स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में सुविधाएं और बेड बढ़ाए हैं उससे ज्यादा तेज गति से कोरोना फैला है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 30 अप्रैल तक जिले के विभिन्न अस्पतालों में 380 मरीज भर्ती थे। इनमें से करीब 100 मरीज जिले के नागरिक अस्पतालों में भर्ती थे। लेकिन 18 मई तक जिले के सरकारी अस्पतालों में ही करीब 285 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 36 वेंटिलेटर पर हैं जबकि अप्रैल तक जिलेभर के सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में ही कुल 30 मरीज वेंटिलेटर पर थे। जिलेभर की बात करें तो कुल 80 मरीज वेंटिलेटर पर हैं और करीब 760 मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
मृत्यु दर बढ़ने का कारण लोगों की लापरवाही है। लोग लॉकडाउन के बावजूद अभी भी घरों से निकल रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमित होने के बाद भी आखिरी स्टेज पर अस्पताल पहुंचते हैं तब तक स्थिति हाथ से बाहर जा चुकी होती है। इतना ही नहीं लोग लक्षण होने के बावजूद सैंपल नहीं करवा रहे। इसी कारण मृत्यु दर बढ़ रही है।
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डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन।
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