कोरोना संक्रमित मरीज के उपचार पर हर रोज 12 हजार रुपये खर्च को लेकर एक ऑडियो वायरल हुआ है। ऑडियो में आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए यूनिट में काम करने वाला एक कर्मचारी मरीज के परिजनों उपचार पर होने वाले पूरे खर्च की बात कहकर रिपोर्ट नार्मल होने की बात कह रहा है। अब वायरल ऑडियो का मामला स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के दरबार में पहुंच गया है। परिजनों ने उनसे मामले की जांच करवाने का आग्रह किया है।
बब्याल के रहने वाले उद्यम सिंह ने बताया कि उनके पिता की कई दिन से तबीयत खराब थी। शुक्रवार के वे उन्हें कैंट के नागरिक अस्पताल में लेकर आए थे। जांच के चिकित्सकों ने कोरोना के लक्षण होने पर उन्हें एमएम अस्पताल स्थित कोविड यूनिट में रेफर कर दिया गया। वह खुद एंबुलेंस किराये पर लेकर पिता को मुलाना ले गया। यहां कोरोना टेस्ट के लिए उससे 2400 रुपये जमा करवाए गए। इसके बाद कर्मचारी उसके पिता को अंदर ले गए। टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें एक कर्मचारी ने फोन किया।
बुजुर्ग ओमप्रकाश की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कोविड़ यूनिट के कर्मचारी ने मरीज के बेटे उद्यम के दोस्त सुभाष वर्मा के पास फोन किया। सुभाष को फोन कर कर्मचारी ने कहा कि ओमप्रकाश की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। अब उसे चार- पांच दिन यहां दाखिल रहना पड़ेगा। दो-तीन दिन में भी उनकी रिपोर्ट नार्मल आ सकती है । रिपोर्ट पॉजिटिव आने से पहले 7000 हजार रुपये का बिल बन चुका है। अब रोजाना उपचार पर 12000 रुपये का खर्च आएगा । इसमें दोबारा होने वाले टेस्ट की फीस भी शामिल है। पूछे जाने पर कर्मचारी ने खुद को कोविड़ यूनिट में आउटसोर्सिंग एजेंसी का कर्मचारी बताया । वायरल ऑडियो में बातचीत कर रहे कर्मचारी से जब बात की गई तो उसने बताया कि ओमप्रकाश के जानकार ने उससे खर्च के बारे में बात की थी। तभी उसने यह बताया कि रोज 12000 रुपये खर्च आएगा। अभी तक उन्होंने टेस्ट फीस के सिवाय कोई पैसा नहीं दिया। हालांकि उसने यह बताने से इंकार कर दिया कि यूनिट में वह किस पद पर कार्यरत है।
कोरोना मरीज ओमप्रकाश के जानकार सुभाष वर्मा ने कहा कि उपचार के नाम पर यह बड़ा स्कैंडल है। जबकि ज्यादातर मरीजों का उपचार फ्री हो रहा है। ऐसे में फिर भी मरीजों के साथ लूट हो रही है। वर्मा ने कहा कि अभी तक तक उन्होंने कोरोना टेस्ट की फीस के अलावा कोई पैसा नहीं किया। मगर उनसे लगातार पैसे की डिमांड हो रही है। अन्यथा मरीज को ऐसे ही डिस्चार्ज करने की धमकी दी जा रही है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
---------------------------
किसी की जिंदगी इस तरह दाव पर नहीं लगाई जा सकती। जो भी टेस्ट होते हैं वह सरकारी होते हैं। लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही नेगेटिव और पॉजिटिव बताया जाता है। इस तरह की ऑडियो से हमारे संस्थान को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। किसी भी मरीज से कोई भी पैसा नहीं लिया जाता न लिया गया है। जहां तक कर्मचारी की बात है तो यह पता किया जाएगा कि यह है कौन? पीएमओ कैंट का भी फोन आया था उन्हें भी हमने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
डॉ. एलएन गर्ग, अधीक्षक एमएमयू मेडिकल कालेज एवं अस्पताल।