बराड़ा। अमेरिका से भारत भेजे जा रहे भारतीयों के तीसरे विमान में भारत पहुंचे लोगों में पांच युवा बराड़ा के हैं। इनमें से कोई कर्जा लेकर तो कोई जमीन बेचकर डंकी के जरिये अमेरिका पहुंचा। इनके अब भारत आने से खर्च किया सारा रुपया मिट्टी हो गया।
इसकी शिकन उनके परिजनों के माथे पर साफ दिखाई दे रही है। अपने बच्चों के भारत वापस आने पर सभी को गम सता रहा है और कोई भी बात करने से इनकार कर रहे हैं, क्योंकि लाखों रुपये गंवाने के कारण सभी गमजदा हैं। सोमवार को बराड़ा के गांव राजोखेड़ी का लवप्रीत, ऋषभ, शम्मी सैनी, दिलप्रीत और नीतू रानी घर पहुंचे।
प्लॉट बेचकर जुटाए थे 50 लाख
लवप्रीत कुछ महीने पहले ही अमेरिका गया था। लवप्रीत के पिता करनैल सिंह बराड़ा में दर्जी का काम करते हैं और कुछ सुन नहीं सकते। उन्होंने बताया कि लवप्रीत पहले भी किसी देश में गया था जहां से वापस आ गया था। अब प्लाॅट और कृषि योग्य जमीन बेचकर करीब 50 लाख खर्च कर उसे अमेरिका भेजा था लेकिन अब उसे भारत वापस भेजने से पूरा परिवार दुखी है। लवप्रीत और दिसंबर 2024 को भारत से रवाना हुआ और एक फरवरी 2025 को अमेरिका पहुंचा।
युवतियां भी भेजीं वापस
शम्मी सैनी के पिता सुशील सैनी सरपंच हैं। इसके अलावा दिलप्रीत सिंह के पिता अमर सिंह छोटे किसान हैं। उन्होंने जमीन बेचकर दिलप्रीत को भेजा था। दिलप्रीत दो बहनों का इकलौता भाई है। दिलप्रीत 11 दिसंबर 2024 को भारत से रवाना हुआ और दो फरवरी 2025 को अमेरिका पहुंचा। नीतू रानी के पिता करतार सिंह बैंक से रिटायर्ड हैं। नीतू एक जनवरी 2025 को भारत से रवाना हुई और पांच फरवरी को अमरीका पहुंची थी। वहीं, ऋषभ 26 सितंबर 2024 को भारत से इंग्लैंड गया और वहां से वह अमेरिका निकल गया। 29 जनवरी 2025 को अमरीका पहुंचा था। जानकारी के अनुसार इनमें से कई युवा कर्जा लेकर तो कई अपनी जमीन बेचकर डंकी के जरिये अमेरिका पहुंचे।