अब नगर निगमों के कमिश्नर पदों पर एचसीएस अफसर भी तैनात हो सकेंगे। हरियाणा सरकार ने अध्यादेश पास करके हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट में संशोधन कर दिया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अभी तक नगर निगम के कमिश्नर पद पर केवल आईएएस अफसर ही तैनात हो सकता था और वे भी पांच साल का अनुभव प्राप्त। वर्तमान में अंबाला, पंचकूला और करनाल में एचसीएस नगर निगम आयुक्त हैं।
कैबिनेट मीटिंग में हुई थी चर्चा
इस संबंध में विगत दिनों कैबीनेट की बैठक में इस बाबत एक प्रस्ताव लाया गया था, जिस पर चर्चा के बाद ये तय हुआ कि आईएएस अफसरों की कमी को देखते हुए फिलहाल एचसीए अफसरों को ये शक्तियां दे दी जाए, जिससे उन्हे नगर निगमों में आयुक्त पदभार संभालने में वैधानिक अचड़चन का सामना न करना पड़े। सरकार का कहना था कि उनके पास आईएए अफसरों की कमी थी, इसलिए उन्होंने एचसीए अफसरों की तैनाती निगम आयुक्त पर की हुई थी। मगर अब सरकार ने अध्यादेश लाकर हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट कारपोरेशन की धारा 45 के उपखंड (1) में संशोधन कर दिया है।
हरियाणा सरकार के वैधानिक विभाग ने इस अध्यादेश के बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अंतर्गत म्यूनिसिल एक्ट में किए गए संशोधन के तहत हरियाणा सरकार ने अब नगर निगम आयुक्त बनने के लिए आईएएस अफसर होने की बाध्यता को खत्म कर दिया है। साथ ही ये स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस पद पर शोभनीय अफसर की नियुक्ति कर सकती है। इसकी सूचना सरकार ने वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में देनी थी। मगर किसी कारणवश वीरवार को सुनवाई टल गई। अगली सुनवाई दस सितंबर को होगी।
मेयर, पार्षदों को झटका, फिर बढ़ेगी तकरार
हरियाणा सरकार ने इस फैसले के बाद अंबाला के मेयर रमेश लाल मल व उन पार्षदों को झटका लगा है, जिन्होंने म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) के कमिश्नर को निशाना बनाते हुए हाईकोर्ट में इस बाबत याचिका डाली थी। सरकार को इस पर वीरवार को अपना जवाब दाखिल करना था। इसी जवाब के संदर्भ ने हरियाणा सरकार ने हरियाणा म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट में ही संशोधन कर ये साफ कर दिया है कि अब सरकार न केवल आईएएस बल्कि किसी भी शोभनीय अफसर को म्यूनिसिपल कमिश्नर के पद पर तैनात कर सकती है। दरअसल, अंबाला के मेयर रमेशलाल मल व उनके साथ बारह पार्षदों की एमसीए कमिश्नर शक्ति सिंह से विरोधाभास चल रहा था। मेयर का कहना था कि कमिश्नर उनके खतों का जवाब नहीं देते। इसी विरोध में पिछली एमसीए सदन की बैठक को मेयर ने स्थगित कर अपने बारह पार्षदों के साथ बायकाट किया था। इसी के बाद मेयर व कुछ पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली थी।
हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार
दरअसल, सरकार अभी तक म्यूनिसपिल कारपोरेशन एक्ट को दरकिनार कर एचसीए अफसरों को नगर निगम पदों पर आसीन किए हुए थे। हरियाणा सरकार ने ऐसी व्यवस्था भी अभी कुछेक महीने पहले ही बनाई थी। अंबाला के मेयर रमेश लाल मल ने सरकार के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। हाईकोर्ट से इस मसले पर सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए करारी फटकार लगाई थी और हाईकोर्ट ने तुरंत प्रभाव से नगर निगम अंबाला के आयुक्त पद पर कार्यरत एचसीएस अफसर के काम पर रोक लगाते हुए सरकार से 20 अगस्त को जवाब तलब किया था। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि यदि सरकार ने आयुक्त पद पर एचसीए अफसरों की तैनाती करनी थी, तो उन्होंने म्यूनिसिपल एक्ट में संशोधन क्यों नहीं किया? उन्होंने एक्ट की धज्जियां क्यों उड़ाई? अब सरकार ने इस बाबत एक्ट में संशोधन कर अपना जवाब तैयार कर लिया है, जिसे अब दस सितंबर को दाखिल किया जाएगा।
इस बाबत सरकार द्वारा जारी किया गया अध्यादेश और अधिसूचना की प्रति स्थानीय निकाय निदेशालय हरियाणा ने एमसीए कार्यालय में भेज दी है। सरकार ने इस बाबत हाईकोर्ट में जवाब देना है। वे अभी सरकार के आगामी आदेशों की इंतजार कर रहे हैं। जैसे आगामी आदेश आएंगे, उसी के मुताबिक वे काम करेंगे।
-शक्ति सिंह, कमिश्नर, म्यूनिसिपल कारपोरेशन, अंबाला
वीरवार को हाईकोर्ट में तारीख थी। लेकिन व्यस्तताओं की वजह से केस पुटअप नहीं हो पाया और केस की सुनवाई को दस सितंबर तक टाल दिया है। हमें नहीं मालूम सरकार ने क्या जवाब तैयार किया है। सरकार अपना जवाब हाईकोर्ट में दाखिल करे। उसके बाद हाईकोर्ट जो आदेश देगा, वही मान्य होगा।
-रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए