अंबाला। जिस घर से मां का साया उठ जाए, उस घर में बेटियों का जीवन संघर्षों से अक्सर भरा देखा गया है। हरियाणा की ऐसी ही बेटियां संघर्षों को किक देकर अपने जीवन का नया ट्रेक तैयार कर रहीं हैं। वह समय के तजुर्बों से सीखकर आगे बढ़ी हैं। वे ऐसे खेल में कीर्तिमान स्थापित कर रहीं हैं, जिसका उनके परिवार से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। हम बात कर रहे हैं फुटबॉल की महिला टीम की। इसमें शामिल बेटियां राष्ट्रीय स्तर तक अपने खेल को ले जा चुकी हैं।
हिसार के गांव मंगाली निवासी आशीष ने बताया कि उसकी छह बहनें और एक भाई है। आठ साल पहले उसकी मां की मौत हो गई थी। घर की स्थिति ठीक नहीं थी। दादी और बड़ी बहन ने काम का जिम्मा उठाया। उसकी बहन प्रियंका गांव के सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा की पढ़ाई करती है और वह फुटबाॅल की नेशनल खिलाड़ी है। बहनों के कहने पर वह पिछले पांच साल से वह फुटबाॅल खेल रही है। घर का काम और खेल के कारण पढ़ाई का समय नहीं मिलता है। इस कारण सिर्फ रात में ही बड़ी मुश्किल से पढ़ाई हो पाती है।
मंगाली की तमन्ना ने बताया कि वह 10वीं कक्षा में है और उसे कोच ने खेलने के लिए कहा तो दादा ने मना कर दिया था। माता-पिता के समझाने के बाद वह खेलने लगी। अब उसे खेलते हुए चार साल हो गए हैं। वह नेशनल में गोल्ड मेडलिस्ट है। इसी तरह से उसकी बहन नेहा इंटरनेशनल खिलाड़ी है। उसने वर्ष 2021 में वर्ल्ड कप में भाग लिया था। इसके बाद उसने चेन्नई में इंडिया कैंप भी प्रतिभाग किया था।
मंगाली की रेणु ने बताया कि सात साल पहले उसके पिता की मौत हो गई थी। तब उसने खेलना शुरू किया तो रिश्तेदारों ने खेलने को मना कर दिया था। तभी पड़ोस में रहने वाली अनीता की खेल के तहत सरकारी नौकरी लग गई। इस बात ने मां को काफी प्रेरित किया। मां आगे चलकर उसके पक्ष में खड़ी हो गई और उसे खेलने का हौसला दिया। अब वह ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडलिस्ट है। उसकी एक बहन है और वह भी गोल्ड मेडलिस्ट है।
अंबाला शहर के नसीरपुर निवासी हर्ष ने बताया कि वह बाल भारती पब्लिक स्कूल में 12वीं कक्षा में है। पिछले चार साल से वह फुटबाॅल खेल रही है। स्कूल में लड़कों को फुटबाॅल खेलते हुए उसके मन में भी खेलने की ललक जागी और वह भी खेलने लगी। शुरू में मम्मी-पापा को दिक्कत हुई कि लड़की है, कैसे खेलेगी लेकिन अब माता-पिता पूरा सहयोग करते हैं।