प्रदेश सरकार ने एक जनवरी से प्रदेश के गेस्ट टीचरों का मेहनताना बढ़ाने का ऐलान किया था। लेकिन प्रदेश सरकार की यह घोषणा गेस्ट टीचरों को रास नहीं आई और वीरवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गेस्ट टीचरों ने वीरवार को अंबाला सांसद और केंद्रीय मंत्री सैलजा के घर का घेराव कर जमकर हंगामा किया।
सैलजा के आवास पर नहीं होने से नाराज गेस्ट टीचर वहीं बैठ गए और इस जिद पर अड़ गए कि जब तक सैलजा उनकी समस्या पर सोनिया व राहुल गांधी से बातचीत कर सकारात्मक जवाब नहीं देंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इसी के चलते गेस्ट टीचर शाम तक सैलजा के आवास पर डटे रहे और नारेबाजी करते रहे। शाम को गेस्ट टीचरों ने ये भी घोषणा कर दी है कि आंदोलन का पहला चरण 11 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान सुबह से शाम पांच बजे तक गेस्ट टीचर धरना देंगे। जबकि पांच जनवरी को अंबाला लोकसभा क्षेत्र के तमाम गेस्ट टीचर सैलजा की कोठी पर पहुंचेंगे।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष शशि भूषण, सतनारायण, कुलदीप चौहान, कमल वालिया, अरविंद बराड़ा, यमुनानगर से शिवचरण, सतपाल शर्मा, शाम कुमार, बलदेव शास्त्री, अमित कुमार, गुलाब सिंह, प्रदीप, जसविंद्र, पंकज रत्ती, राजेश शर्मा, मनोज, अमन, साजिद खान, दर्शन, नीलम शर्मा, मीनाक्षी, कविता, चंद्रकांता, सोनम इत्यादि उपस्थित रहे।
रोष जुलूस भी निकाला
गेस्ट टीचर सुबह कैपिटल चौंक पर एकत्रित हुए। वहां से इन गेस्ट टीचरों ने रोष जुलूस शुरू किया और सैलजा के आवास तक पहुंचे। वहां इन गेस्ट टीचरों की जिद थी कि वे सैलजा को अपना ज्ञापन देंगे। लेकिन वहां जाकर उन्हें मालूम हुआ कि सांसद सैलजा कहीं बाहर है और 5 जनवरी के बाद आएंगी। इसी बात को लेकर वह भड़क गए और उन्होंने वहीं हंगामा करते हुए वहीं धरना जमा दिया।
गेस्ट टीचरों का संघर्ष कई सालों से चल रहा है। लेकिन अब हरियाणा सरकार के आदेश ने आग में घी का काम कर दिया। गेस्ट टीचरों को विश्वास था कि हरियाणा सरकार उन्हे स्थायी करने की घोषणा कर देगी। लेकिन ऐसा करने की बजाए प्रदेश सरकार ने 1 जनवरी से उनके मेहनताने में बढ़ोतरी कर दी। गेस्ट टीचरों का कहना है कि सरकार ने उन्हे लॉलीपाप देकर चुनावी वर्ष में शांत रहने की कोशिश की है।
2005 में रखे गए थे गेस्ट टीचर
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते वर्ष 2005 में हुड्डा सरकार ने ही स्कूल में ठेके पर टीचर रखे गए और इन्हें गेस्ट टीचर का नाम दिया गया। हर साल इन गेस्ट टीचराें का ठेका रिन्यू कर दिया जाता था। लेकिन अब पिछले कुछ सालों से गेस्ट टीचर खुद को स्थायी टीचर के रूप में पक्का करने की मांग कर रहे थे। इन शिक्षकों का कहना है कि सभी शिक्षक अनुभवी हो चुके हैं, इसलिए उन्हे स्थायी किया जाए।