प्रदेश भर में हाईकोर्ट के आदेश पर सरकारी मिडिल स्कूलों से हटाए गए 3581 टीजीटी गेस्ट टीचरों में से सैंकड़ों टीचरों को हरियाणा शिक्षा विभाग ने फिर से सरकारी मिडिल स्कूलों में ही एडजस्ट कर दिया है। जबकि विभाग ने हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों को 31 मार्च 2016 तक केवल सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में लगने वाली नौवीं और दसवीं कक्षा को पढ़ाने के लिए बहाल रहने की अनुमति मांगी थी।
हरियाणा शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के समक्ष आग्रह किया था कि हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और इसके लिए विभाग की ओर नियुक्ति प्रक्रिया भी चल रही है, लिहाजा 31 मार्च तक मिडिल स्कूलों से हटाए गए गेस्ट टीचरों को हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में नौवीं और दसवीं कक्षा को पढ़ाने की अनुमति दी जाए, ताकि इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी की वजह से छात्रों की पढ़ाई का हर्जाना न हो।
हाईकोर्ट ने हरियाणा शिक्षा विभाग के आग्रह को स्वीकार करते हुए गेस्ट टीचरों को 31 मार्च तक पढ़ाने और अपनी नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के आदेश दिए थे। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों को दरकिनार करते हुए हरियाणा शिक्षा विभाग ने हटाए गए गेस्ट टीचरों को हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की बजाए सरकारी मिडिल स्कूलों में ही एडजस्ट कर दिया। उल्लेखनीय है कि अंबाला से भी सैंकड़ों गेस्ट टीचरों को हाईकोर्ट के आदेशों के बाद हटाया गया था।
याची बोले, विभाग ने हाईकोर्ट को किया गुमराह
इसी मसले पर एडवोकेट जगबीर मलिक ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगा दी है। एडवोकेट मलिक ने हाईकोर्ट को बताया कि इसी संबंध में प्रदेश भर से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक विभाग ने मिडिल स्कूलों से हटाए गए 3581 गेस्ट टीचरों में से डेढ़ हजार से अधिक गेस्ट टीचरों को शिक्षा विभाग ने सरकारी मिडिल स्कूलों में ही एडजस्ट कर दिया है। जबकि विभाग ने हाईकोर्ट से उन्हे हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 31 मार्च 2016 तक दो कक्षाओं को पढ़ाने की अनुमति मांगी थी। एडवोकेट मलिक ने याचिका में कहा कि शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट को गुमराह किया है और हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना भी की है। इस मामले में हाईकोर्ट ने हरियाणा शिक्षा विभाग से जवाब तलब कर लिया है
हाईकोर्ट ने पूछा, क्यों हो रही है नियुक्तियों में देरी?
हाईकोर्ट में हरियाणा शिक्षा विभाग ने हटाए गए गेस्ट टीचरों को 31 मार्च तक हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में एडजस्ट करने की अनुमति इसलिए मांगी थी कि तब तक विभाग इन स्कूलों में रिक्त पड़े पदों पर शिक्षकों की नियुक्तियां कर लेगा। लेकिन अभी तक नियुक्तियां नहीं हो पाई। एडवोकेट जगबीर मलिक ने बताया कि हाईकोर्ट ने अब शिक्षा विभाग से यह भी पूछा है कि आखिरकार नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक संपन्न क्यों नहीं हुई? नियुक्ति प्रक्रिया को लटकाने में कौन अफसर जिम्मेवार है? और कब तक नियुक्तियां पूरी हो जाएंगी? एडवोकेट के अनुसार हरियाणा शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट को गुमराह किया है, इसलिए हाईकोर्ट ने अफसरों से जवाब तलब किया है।
अब निदेशालय ने शिक्षा अफसरों से मांगी रिपोर्ट
इसी मसले पर गंभीरता दिखाते हुए डायरेक्ट एलीमेंट्री हरियाणा ने प्रदेश में सभी जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि अपने-अपने जिलों में प्राइमरी, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में सोशल स्टडी, गणित और हिंदी के टीचरों की स्कूल वाइज रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर भेजें। ताकि मालूम चल सके कि हटाए गए गेस्ट टीचरों को कहां-कहां एडजस्ट किया गया है। हटाए गए गेस्ट टीचर उक्त विषय ही पढ़ाते थे। आदेशों में मौलिक शिक्षा अधिकारियों को ये भी कहा गया है कि जानकारी भेजे गए कॉलम के तहत ही भेजें और जो जानकारी वे कॉलम में भरकर भेजेंगे, उसके पूरी तरह से जिम्मेवार भी वही होंगे।
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सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्हे कॉलम में भरकर ये जानकारियां सात दिन के भीतर हरियाणा मौलिक शिक्षा निदेशालय को भेजना है। सभी स्कूलों से आग्रह है कि इस जानकारी को प्राथमिकता पर उपलब्ध करवाएं। बाकी इस बारे में आला अफसर ही बता सकेंगे।
-जिले सिंह, डिप्टी डायरेक्ट, हरियाणा शिक्षा विभाग-