माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की सोमवार को सुनवाई हुई। इसमें हरियाणा सरकार ने अपना जवाब देते हुए अंबाला में दर्ज डिजिटल अरेस्ट के दो मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को देने की बात कही है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने मामले में पिछली सुनवाई को हरियाणा सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा था। अब सुप्रीम कोर्ट देशभर के डिजिटल अरेस्ट के मामलों की जांच सीबीआई को दे सकता है तो अंबाला में इन ठगी का शिकार पीड़ितों की उम्मीद जगी है।
पीड़ितों का कहना है कि अब जब सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस कर डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की जानकारी मांगी तो अगली सुनवाई में यह सामने आ सकता है कि यह कई हजार करोड़ की ठगी है और देश के सैकड़ों लोग अब भी तक इन ठगों का निशाना बन चुके हैं।
बुढ़ापे के लिए जमा की थी पूंजी
अंबाला सिटी निवासी शशी बाला (71) व उनके पति हरीश चंद सचदेवा (73) को सितंबर में 14 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 1.05 करोड़ रुपये ठग लिए थे। इस दंपती ने ही देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई को पत्र लिखकर पीड़ा बताई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले में सुनवाई की। सोमवार को जब देशभर के ऐसे मामलाें को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा तो उन्होंने कहा कि अब इन गिरोहों की कमर टूटेगी। हरीश चंद सचदेवा बिजली निगम से सेवानिवृत हैं तो उनकी पत्नी शशी बाला रोडवेज में ऑडीटर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। हरीश सचदेवा ने बताया कि यह धनराशि उन्हाेंने अपने बुढ़ापे के लिए बचाकर रखी थी। उन्हें ठगी गई धनराशि वापस चाहिए। उन्होंने बताया कि एक कॉल उन्हें कंबोडिया से आई थी। ऐसे में यह गिरोह विदेशों से नेटवर्क चला रहे हैं, इनका पकड़ा जाना जरूरी है।
कोर्ट के ऑर्डर दिखा बुजुर्ग से 23.98 लाख रुपये ठगे
अंबाला साइबर क्राइम थाना में दर्ज दूसरे छावनी के राणा पार्क निवासी प्रीत पाल सिंह से 23 लाख 98 हजार 850 रुपये की ठगी के मामले को भी सीबीआई को सौंपा जा सकता है। इस मामले में पीड़ित प्रीत पाल सिंह के पास 11 सितंबर को एक फोन आया, फोन करने वाले ने कहा कि यह सरकारी काॅल है और वह फोन नहीं उठा रहे। इसके बाद तुरंत एक व्हाट्सएप नंबर से ऑडियो ग्रुप कॉल आई। इसमें तीन नंबरों से लोग जुड़े थे। उनमें से एक व्यक्ति ने बताया कि मुंबई पुलिस ने नरेश गोयल नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का काम करता है। इसके बाद सीबीआई अधिकारी बनकर राजेश मिश्रा ने बात की। कुछ देर बाद उनके व्हाट्सएप पर महाराष्ट्र पुलिस के साथ एक व्यक्ति की फोटो व कुछ दस्तावेज भेजे, तभी फिर व्हाट्सएप काल आई तो उन्होंने कहा कि उस आदमी को वह नहीं जानते और न ही उसके साथ किसी प्रकार का कोई लेन-देन है, फिर यह लोग 11 सितंबर तक उन्हें धमकाते रहे। 12 सितंबर को एक वीडियो कॉल आई और इसमें उन्हें एक जज की ड्रेस में बैठा व्यक्ति नजर आया जोकि उन्हें डराने लगा और उसने पुलिस की वर्दी में बैठे व्यक्ति को बोला कि इनको अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। जब उन्होंने अपनी बात रखनी चाही तो इसे अनसुना कर दिया। इसके बाद राजेश मिश्रा नाम के व्यक्ति का फोन आया और उसने कहा कि अगर वो इस केस से अपना नाम कटवाना चाहते हैं तो उन्हें सरकार के गुप्त खाते में 23 लाख 98 हजार 850 रुपये जमा करवाने होंगे जोकि उन्होंने डर के कारण करवा दिए।