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सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के पदों पर हो रही पदोन्नति पर हाईकोर्ट की रोक

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सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत फार्मासिस्ट के पदों पर की जा रही पदोन्नति के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने अगले आदेशों तक रोक लगा दी है। साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और महानिदेशक स्वास्थ्य को नोटिस जारी कर 28 अगस्त तक जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट में यह भी साफ कर दिया कि जब तक वरिष्ठता सूची 1992, 2011 और 2014 के अनुसार 2019 में जारी वरिष्ठता लिस्ट में संशोधन नहीं होता तब तक नई पदोन्नति न की जाए। जिनकी प्रमोशन के लिए दस्तावजे मांगे गए हैं, वह हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेंगी। जस्टिस सुखबीर सहगल ने यह आदेश जारी किए हैं। करीब 20 से ज्यादा फार्मासिस्ट ने हाईकोर्ट में केस दायर किया था। इनमें अंबाला से प्रदीप कुमार भी शामिल हैं।
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क्या है मामला
दरअसल फार्मासिस्ट के वकील नीरज गोयल ने बताया कि विभाग द्वारा रोजगार कार्यालय के अनुमोदन पर साक्षात्कार लेकर और मेरिट एडहॉक बेस पर स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट को 1986, 87 और 88 में नियुक्ति दी गई थी। इसके बाद 1990 में इन सभी को सरकार के आदेशों पर रेग्युलर कर दिया गया था। इस संबंध में 1992 में एक वरिष्ठता सूची भी जारी की गई। इस प्रकार विभाग ने वर्ष 2011 और 2014 में संभावित वरिष्ठता सूची जारी की। इन तीनों सूची में वर्ष 1986, 87 और 88 में एडहॉक पर लगे फार्मासिस्ट का वरिष्ठता क्रमांक सही थी। लेकिन 2019 में विभाग ने उन लोगों को सीनियर बना दिया, जोकि वर्ष 2011 और 14 की सूची में जूनियर थे। स्वास्थ्य विभाग ने इन फार्मासिस्ट की एडहॉक सेवाओं के अनुभव को सर्विस में काउंट नहीं किया।
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