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भगवान दुर्जनों का करते हैं संहार : वशिष्ठ महाराज

Thu, 11 Sep 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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अंबाला छावनी के रामबाग ​स्थित गौशाला में प्रवचन  करते कथाव्यास। प्रवक्ता
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अंबाला। छावनी के रामबाग गोशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को कथा के तीसरे दिन सतगुरु देव देशमुख वशिष्ठ महाराज ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ समुद्र मंथन की कथा का सारगर्भित वर्णन किया। साथ ही बताया कि भगवान सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार करते हैं।
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उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न-भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मों द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है, तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार किया करते हैं।
समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि मानव हृदय संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता। विदुरानी ने श्री कृष्ण को देखकर अपनी बुद्धि को खो दिया और वे खिलाने के लिए लाए केलों की जगह छिलके ही खिलाने लगीं। इस समय पति देव विदुर भी आ गए। उन्होंने इस दृश्य को देखा और अपनी पत्नी पर नाराज हो गए। जब विदुरानी ने अपनी भूल समझी, तो उन्हें बहुत दुख हुआ। प्रेम के वश में आकर पत्नी की यह गलती को समझकर विदुर भगवान को केले खिलाने लगे। भगवान ने खुश होकर कहा, आपने जो मुझे केले खिलाए, लेकिन सच यह है कि जितनी मिठास उन छिलकों में थी वो इन केलों के गूदों में कहीं नहीं थी।
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अंबाला छावनी के रामबाग स्थित गौशाला में प्रवचन  करते कथाव्यास। प्रवक्ता

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