अंबाला सिटी। जब-जब भी धरती माता पर अधर्म व अंहकारियों का प्रकोप बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु अवतरित होते हैं और अधर्मियों का सर्वनाश करते हैं। मगर भगवान निश्चित समय पर आकर प्रमाण को दिखाते हैं। इसलिए कहा गया है कि भगवान के घर में देर है, मगर अंधेर नहीं। उपरोक्त शब्द अंबाला सिटी सेक्टर-7 के श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रही श्रीराम चरित मानस रामायण पाठ की कथा सुनाते हुए कथा व्यास पंडित भगवती प्रसाद पुरोहित ने कहे। उन्होंने कहा कि जब धरती पर राक्षस प्रजाति उत्पात मचा रही थी तब धरती माता व गोमाता भगवान भोले शंकर के पास पहुंचे और राक्षसों के प्रकोप से अपनी सुरक्षा करने को कहा।
तब भगवान शंकर ने देवताओं को एकत्रित कर समाधान करने को कहा, जहां पर ब्रह्मा, विष्णु के दरबार पहुंचे सभी देवी देवताओं ने धरती माता की सुरक्षा करने की गुहार लगाई। जहां पर भगवान विष्णु ने सभी को स्वयं धरती पर मनुष्य रूप में जन्म लेने का आश्वासन दिया। उसके बाद सूर्यवंशी राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम ने जन्म लिया।
प्रभु श्रीराम भगवान विष्णु के 7वें अवतार थे जिन्हें मानव रूप में पूजे जाने वाले सबसे पुराने देवता मानते हैं। भगवान श्रीराम का जन्म त्रेतायुग में हुआ था। भगवान श्रीराम का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था, जिसकी स्थापना सूर्य के पुत्र राजा इक्ष्वाक ने की थी, इसलिए भगवान श्रीराम को सूर्यवंशी भी कहा जाता है।
कथा से पूर्व प्रतिदिन की तरह पंडित धमेन्द्र गौड़ व त्रिलोचन शर्मा ने विधिवत समाजसेवी मुनीष अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल व मधुर वालिया परिवार के सदस्यों ने माध्यम से पूजन किया। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।