अंबाला सिटी। निरंकारी राज पिता रमित ने रविवार को कहा कि इंसान अपने जीवन में ही मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। मगर इसके लिए इंसान को घोर तप करना होगा। उन्होंने वैर, विरोध, इर्षा, अहंकार रूपी अज्ञानता के अंधेरे में जी रहे मानव को परमात्मा से जुड़कर मुक्ति प्राप्त करने का संदेश दिया।
अंबाला सिटी के जंडली में आयोजित निरंकारी संत समागम में उमड़े भक्तों के बीच राजपिता रमित ने कहा कि अगर इंसान ठान ले तो परमात्मा को इसी जीवन में प्राप्त कर सकता है। हर एक मानव जीवन के पास यह अवसर है कि वह परमात्मा को प्राप्त कर सकता है, जिस तरह से संत कबीर दास मीराबाई वह इतिहास के अन्य संतों ने खुद को पहचान कर परमात्मा की प्राप्ति की है। उसी तरह इंसान भी यह प्राप्ति कर सकता है।
ज्ञान चक्षु से होतें हैं परमात्मा के दर्शन
राजपिता रमित ने कहा कि अर्जुन भी बहुत बड़ा योद्धा था। घूमती मछली की आंख पर निशाना लगा सकता था। इसके बाद भी श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन को ज्ञान चक्षु देकर अपने विराट रूप का दर्शन दिया था। इसीलिए परमात्मा को पाने के लिए गुरु की नजर अनिवार्य है। जैसे मीराबाई बचपन से ही श्रीकृष्ण की भक्ति में ली थी, मगर इसके बाद भी उन्हें रामरतन धन नहीं मिला। मगर जब वे गुरु की शरण में गई तो उन्होंने कहा की पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। उन्होंने कहा कि प्रत्येक इंसान की परमात्मा को पाने की अवस्था भिन्न होती है, जिस तरह संतों ने परमात्मा की प्राप्ति की है। इस तरह इंसान भी स्वयं को जानकर परमात्मा की प्राप्ति कर सकता है।
अपनी ही हालात से अनजान है इंसान
राजपिता रमित ने कहा कि इंसान अपने हालातों से बेखबर हैं। वह हमेशा ही अपने सुख से खुश नहीं होता, बल्कि दूसरों के सुख को देखकर दुखी होता है। ऐसा इंसान कभी भी परमात्मा की प्राप्ति नहीं कर सकता। वर्तमान में यह हालत पूरे संसार की हो गई है। संसार में जब भी कोई संत इस बीमारी से बाहर आने को जागरूक करता है तो इंसान उसे ही बीमार समझने लग जाता है मगर सच्ची निष्ठा और भक्ति से इस सच्चाई को बदला जा सकता है।