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किशोरी के साथ हुआ था दुराचार

Wed, 02 Nov 2016 12:10 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
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बैठक के दौरान - फोटो : amar ujala
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जिस किशोरी को  24 अक्तूबर को बेहोशी की हालत में पुलिस सिटी सिविल अस्पताल में छोड़ गई थी, उसके साथ दुराचार किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह कि पुलिस ने न तो इस दिशा में कोई कार्रवाई की और न ही इस पर गंभीरता दिखाई। अब जब मामला पूरी तरह से सुर्खियों में आ गया, तो पुलिस प्रशासन मंगलवार को इस मामले में हरकत में दिखाई दिया। एसएचओ से लेकर डीएसपी स्तर के अफसर तक  सिविल अस्पताल में कार्रवाई के लिए पहुंचे। दिनभर पुसिल प्रशासन में कशमकश चलती रही और 01 नवंबर देर शाम पुलिस को इस मामले में पास्को एक्ट के तहत केस रजिस्टर्ड कर आगामी कार्रवाई शुरू करनी पड़ी।
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थाना प्रभारी बलदेव नगर विजय कुमार का कहना है कि इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें सिटी के सबसे पॉश इलाके में रहने वाले एक किशोर समेत अन्यों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार के अंक में अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।

बाल संरक्षण अयोग की टीम भी अस्पताल में पहुंची
मामला संज्ञान में आने के बाद हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की टीम भी अस्पताल में पहुंच गई। इसमें सरदार परमजीत सिंह बड़ौला, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. संगीता माथुर समेत अन्य शामिल रहे। टीम लड़की के पास पहुंची, लेकिन वह बहुत ज्यादा घबराई हुई थी। टीम ने अस्पताल प्रशासन को तुरंत लड़की को सेपरेट वार्ड में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। इसके बाद लड़की को अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया। उसके बाद आयोग ने पुलिस अफसरों से भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी और तुरंत इस मामले में जरूरी कार्रवाई करते हुए इस मामले की तह तक जाने के निर्देश दिए। हालांकि किशोरी थोड़ी घबराई हुई थी, इसलिए आयोग व जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की टीम सोलह साल की किशोरी के बयान दर्ज नहीं कर पाई।
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आनन-फानन में पुलिस ने दर्ज किया केस
इस मामले में लगातार बढ़ रहे दबाव के चलते बलदेव नगर पुलिस ने देर शाम तक आनन फानन में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में पास्को एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। इसमें एक किशोर के नाम व अन्य अज्ञात आरोपियों  के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के दौरान पहले तो बलदेव नगर एसएचओ अपनी टीम के साथ अस्पताल में मुस्तैद दिखे। लेकिन बाद में डीएसपी व महिला पुलिस की टीम भी अस्पताल में पहुंची। पुलिस दावा कर ही है कि इस मामले में पूरी तरह से न्याय होगा।
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पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट को किया नजरअंदाज 
इस मामले में कई ऐसी लापरवाही सामने आई, जिसका खामियाजा रेप से पीड़ित किशोरी को भुगतना पड़ा। दरअसल, पुलिस इस मामले में 24 अक्तूबर को इस किशोरी को सिविल अस्पताल बेहोशी की हालत में छोड़कर चली गई थी। उस वक्त ये दर्ज करवाया गया कि किशोरी ने कुछ जहरीला पदार्थ खा लिया है। इसके बाद इसी दिशा में इलाज चला और गंभीर हालत को देखते हुए बच्ची को पीजीआई रेफर किया गया। 26 अक्तूबर को पीजीआई से बच्ची को वापस अंबाला इलाज के लिए भेज दिया गया। तभी से ये किशोरी सिटी सिविल अस्पताल में भर्ती है। बच्ची के वापस आने की सूचना भी पुलिस को दी गई, लेकिन बच्ची की सुध और बयान लेना उचित ही नहीं समझा गया।
उसके बाद स्वास्थ्य महकमे के चीफ मेडिकल अफसर को जब बच्ची के साथ कुछ गलत होने की सूचना मिली तो उन्होंने बच्ची का मेडिकल करवाने हेतु दो महिला डाक्टरों का बोर्ड गठित कर दिया। महिला डाक्टरों ने लड़की के साथ दुराचार होने की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में करके किशोरी के स्वैब सैंपल फोरेंसिक लैब में भेज दिए हैं। लेकिन इस सारी कार्रवाई के दौरान हद तो तब हो गई, जबकि महिला डाक्टर इस बारे में एक रुक्का रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट पुलिस को सुपुर्द करने पहुंची और पुलिस ने इस रिपोर्ट को ही रिसीव लेने में टाल-मटोल किया। महिला डाक्टर को मजबूरन ये चेतावनी देनी पड़ी कि यदि पुलिस इस मेडिकल रिपोर्ट को रिसीव नहीं करती, तो उन्हे मजबूरन यही वाक्या रिपोर्ट पर लिखकर फाइल करना पड़ेगा। 
उसके बाद इलाका पुलिस ने अपने आला अफसरों से बातचीत कर काफी देर बाद महिला डाक्टर से बच्ची की प्राथमिक मेडिकल रिपोर्ट तो ले ली, लेकिन उसके बावजूद बच्ची के साथ रेप होने संबंधी घटना की दिशा में जांच शुरू नहीं की। दूसरी ओर, स्वास्थ्य महकमे के चीफ मेडिकल अफसर डा. विनोद गुप्ता के निर्देशों पर बच्ची की मेडिकल काउंसलर से काउंसलिंग भी करवाई गई। इसमें बच्ची ने अपने साथ दुराचार होने की बात कबूली और बच्ची ने यही बात अपनी परिजनों को भी बताया। लेकिन फिर भी न तो इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया और न ही कोई कार्रवाई की। लेकिन मंगलवार को मामला सुर्खियां में आने के बाद पुलिस भी हरकत में दिखी और हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग,  जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड व अंबाला चाइल्डलाइन की टीम भी मौके पर पहुंची।


किशोरी पहचानती है घर और दरिंदे का चेहरा
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार किशोरी ने काउंसलिंग में ये बात कबूली है कि उसके साथ एक घर में गलत काम हुआ है। उसे एक किशोर ये कहकर घर में ले गया था कि उसके घर में मम्मी की तबीयत खराब है, यदि वे घर का काम करती है, वे उसे कुछ रुपये देगा। किशोरी उसके घर में काम करने चली गई और वहीं उसके घर में दुराचार हुआ। इस मामले में गैंगरेप की भी पूरी आशंका है, इसलिए पुलिस ने भी एक किशोर समेत अन्य के तहत पास्को एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
सूत्रों के अनुसार बच्ची ने काउंसलिंग में ये बात भी कही है कि यदि उसे मौका-ए-वारदात पर ले जाता है, तो वे उस घर को और उस दरिंदे को पहचान सकती है, जहां उसे ले जाकर उसके साथ गलत काम किया गया। इस मामले में थाना प्रभार बलदेव नगर विजय कुमार कहते हैं कि मामला अभी जांच के दायरे में है। एक आरोपी नाबालिग है, जिसका नाम सामने आया है। बाकी जानकारी बाद में दी जाएगी। उनके अनुसार अभी बच्ची सहमी हुई है। इस मामले में पुलिस द्वारा बयान अभी लिए जाने हैं।
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इस मामले में चिकित्स विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट में जो भी होगा, उसी के तहत पुलिस कार्रवाई करेगी। बच्ची को जरूर न्याय मिलेगा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। फिलहाल इस मामले में पास्को एक्ट के तहत एक किशोर व अन्यों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
-अभिषेक जोरवाल, एसपी, अंबाला

इस मामले में पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि पुलिस वर्दी के बिना ही बच्ची से  पूछताछ करे तो बेहतर होगा। बच्ची बहुत ज्यादा डरी हुई है। इस मामले में पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने 24 अक्तूबर से लेकर 1 नवंबर तक बच्ची के बयान क्यों नहीं लिए? बच्ची का मेडिकल क्यों नहीं करवाया? इस बारे में पुलिस से पूछा गया है। इस मामले में कहीं न कहीं थोड़ी लापरवाही तो प्रतीत हो रही है।
-सरदार परमजीत सिंह बड़ौला, सदस्य, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग


ये मामला काफी गंभीर है, लेकिन पुलिस का इस मामले में सकारात्मक सहयोग नहीं मिला। स्वास्थ्य महकमे ने अपनी नैतिक ड्यूटी को समझते हुए बच्ची का मेडिकल करवाया। इसमें महिला चिकित्सकों ने अपनी ओपिनियन में रेप की पुष्टि कर दी है। पुलिस ने 24 अक्तूबर को बच्ची को सिविल अस्पताल में छोड़ा था, लेकिन उसके बाद मेडिकल के लिए कहा ही नहीं। लेकिन बच्ची की हालत काफी खराब दिख रही थी, इसलिए महिला डाक्टरों के बोर्ड से बच्ची का मेडिकल करवाया गया। बच्ची के स्वैब सैंपल फोरेंसिक लैब में भेज दिए हैं।
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-डा. विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला
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