अंबाला सिटी। शहर पुलिस लाइन डीएवी स्कूल ग्राउंड में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में पांच दिवसीय दिव्य गीता सत्संग के तृतीय दिवस का आयोजन किया गया। यह सत्संग श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
इस मौके पर परिवहन मंत्री अनिल विज, हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्डा मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी प्रमोद वालिया, उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह सचिव एमपी मिश्रा, समाजसेवी राज गोयल करनाल, समाजसेवी राजीव शर्मा लाडी, पंडित तिलक राज शर्मा, रमेश गांधी एवं तिलक राज आनंद ने दिव्य गीता सत्संग के तृतीय दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर मंच पर विराजित गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को पुष्प भेंट कर उनका स्वागत किया।
सत्संग में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता उपदेश से पूर्व महान योद्धा अर्जुन की दृष्टि भ्रमित हुई। भगवान कृष्ण जो अर्जुन के रथ के सारथी थे, वहां से दृष्टि हटी और सामने भीष्म पितामह, गुरु द्रोण, सभी स्वजन, परिजन वहीं दृष्टि अटक गई। जिससे अर्जुन का मन मोह, शोक और धीरे-धीरे विषाद के अधीन हो गया। जिसके चलते अर्जुन अपने कर्तव्य से विमुख हो बैठा। गीता मनीषी ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता उपदेश के माध्यम से अर्जुन की दृष्टि पर आए मोह व शोक के आवरणों को अलग किया और उसे अपने कर्तव्य पर जागरूक रहने की दृष्टि दी।
उन्होंने कहा कि गीता वास्तव में सृष्टि नहीं दृष्टि को बदलती है। जीओ गीता की ओर से गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि व अन्य को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मंच संचालन सुरेश गोयल ने किया। श्रीमद्भगवद्गीता जी की आरती एवं शांति सद्भाव प्रार्थना के साथ दिव्य गीता सत्संग के तृतीय दिवस का समापन हुआ। इस अवसर पर जीओ गीता के चेयरमैन दिनेश ग्रोवर, संयोजक अशोक चावला, प्रधान रविंद्र चोपड़ा, डाॅ. पुनीत पंडित, अजय चावला व अन्य मौजूद रहे। वहीं, दिव्य गीता सत्संग के तृतीय दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं को सत्संग में विशेष रूप से संत डाॅ. स्वामी अनुभवानंद महाराज का भी सान्निध्य मिला।
बच्चों ने किया ध्यान आकर्षित
दिव्य गीता सत्संग में जीओ गीता बाल संस्कार कक्षा के बच्चों ने मंच पर गीता के श्लोकों की प्रस्तुति से न केवल तमाम उपस्थिति का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, बल्कि बच्चों की प्रस्तुतियों से दिव्य गीता सत्संग का पंडाल लगातार करतल ध्वनि से गुंजायमान होता रहा।