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दुश्मनी में बदल गई दोस्ती, हत्या पर खत्म हुआ खेल

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अंबाला। कभी एक-दूसरे के जिगरी यार कब जानी दुश्मन हो गए पता ही नहीं चला। 12 सितंबर 2019 में दोनों के बीच गुरु-चेले को लेकर छोटी सी अनबन शुरू हुई, जो बड़ी रंजिश बन गई। इसी आपसी विवाद का अंत आखिरकार 21 माह बाद जीतू की मौत से हुआ। बताया जाता है कि पहले हमलावर माऊ और जीतू अच्छे दोस्त थे और एक साथ ही रहा करते थे। लेकिन इस बीच पता नहीं कब गुरु-चेले की बात को लेकर आपसी कहासुनी हो गई।
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13 सितंबर 2019 को हाउसिंग बोर्ड चौकी में कच्चा बाजार निवासी सौरभ उर्फ माऊ ने अपने ही अपहरण का केस दर्ज करवाया था। सौरभ उर्फ माऊ ने आरोप लगाया था कि उसे राम किशन कॉलोनी में हमला बोल घायल किया गया था। आरोपी उसे बाइक पर लेकर कलरेहड़ी की ओर चले गए थे, जहां सुनसान इलाके में उससे मारपीट की गई।
इस दौरान एक बंद कमरे में उसके साथ मारपीट भी की गई और उस पर रिवाल्वर भी तानी गई थी। इस मामले में पुलिस ने आपराधिक धाराओं के तहत माऊ के ही दोस्त रहे जीतू सहित अन्य पर मामला दर्ज कर लिया था, तभी से माऊ और जीतू के बीच रंजिश और बढ़ती गई।
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डेढ़ साल पहले भी कार में बैठे जीतू को मारी थी 7 गोलियां
अपहरण, मारपीट के मामले में जब जीतू व उसके साथी जमानत पर बाहर आ गए थे तो माऊ ने साथियों संग जीतू व उसके दोस्तों को गोलियां से भून दिया था। उस समय जीतू कार में अपने दो साथियों के संग जा रहा था कि अचानक तोपखाना बाजार के निकट हमला कर दिया। इस बीच जीतू के करीब सात गोलियां गली थी। जीतू की बहन हंस कुमारी ने बताया कि सात गोलियां मुंह, गर्दन, दोनों कान, कंधे, पीठ में लगी थी। लंबे समय तक चले उपचार के बाद जीतू को मौत से मुंह से निकाला था। उस समय माऊ, रणधीर सहित अन्य पर मामला दर्ज हुआ था।
तीन माह से आर्म्स एक्ट के मामले में फरार चल रहा था माऊ
अंबाला कैंट थाने में पहले भी माऊ पर आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज था। थाना प्रभारी विजय कुमार ने बताया कि यह मुकदमा करीब डेढ़ साल पहले का था। उसी मामले में माऊ जमानत पर आने के बाद फरार चल रहा था और 3 माह से उसे भगोड़ा घोषित किया हुआ था।
एक के बाद एक दोनों आरोपियों ने गोलियां मार निकाली भड़ास
- पहली गोली लगते ही सड़क पर गिर गया था जीतू, उसके बाद सात और गोलियां दागी
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के प्राचीन हाथी खाना मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो बदमाशों ने पुरानी रंजिश के चलते ग्वालमंडी निवासी जीतू को गोलियों से भून दिया। आरोपियों ने भगवान के द्वार के पास यह खूनी खेल खेला। यहां से हर समय भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन लॉकडाउन के चलते इस समय भक्तों की संख्या कम होने के कारण सुबह 8 बजे वहां भीड़ नहीं थी।
बता दें कि 21 साल पहले मरने वाले जीतू पर हमलावर माऊ ने खुद के अपहरण, मारपीट करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया था। उसी रंजिश को दिल में लिए माऊ ने अपने साथी अर्जुन उर्फ अज्जू के साथ मिलकर फिल्मी अंदाज में ताबड़ तोड़ गोलियां बरसाकर जीतू की हत्या कर दी। जीतू पहली गोली लगते ही सड़क पर गिर गया था। मगर माऊ ने एक के बाद एक गोलियां दागी, जब उसका मन भर गया तो बाइक चला रहे अज्जू ने भी बाइक से उतरकर गोली मारते हुए अपनी भड़ास निकाली।
गर्दन, पीठ, टांग, जांघ सहित पेट में लगी थी गोलियां
गोलियों से छन्नी होने के बाद अधमरे जीतू को बचाने के लिए इमरजेंसी डॉक्टर प्रमोद ने 20 मिनट तक प्रयास किए। बीपी बेहद नीचे आने के कारण दवाइयां दी। इस बीच तबीयत बिगड़ती चली गई और जीतू ने दम तोड़ दिया। डॉ. प्रमोद बंसल ने बताया कि जांच की तो आठ गोलियां लगी मिली। दो गर्दन, दो पीठ, एक पेट, एक जांघ, एक टांग व एक गोली छाती में लगी मिली हैं।
छावनी में तब्दील हुआ नागरिक अस्पताल
इस हत्याकांड के बाद पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट हो गया। प्राथमिक जांच में हमलावर एक गैंग से जुड़े होने की बात सामने आने पर आनन-फानन में अंबाला कैंट थाने, बीसी बाजार, हाउसिंग बोर्ड चौकी से पुलिस बुलाने के साथ-साथ दो बसों में भरकर पुलिस के जवानों को बुलाया गया, जो पोस्टमार्टम होने के बाद से लेकर रामबाग तक पूरी तरह से मुस्तैद रहे।
शव का एक्सरे करने पर दिखी सात गोलियां
मृतक के शरीर में निशान के अलावा गोलियों की सही स्थिति जानने के लिए एक्सरे भी करवाया गया। पांच एक्सरे करने पर सात गोलियां शरीर में ही फंसी हुई मिलीं जबकि जांघ पर लगी गोली लगकर निकल गई। इनमें से तीन गोलियां ब्लेडर, दो छाती, एक टांग और एक पेट में फंसी हुई थी। बाद में एक्सरे रिपोर्ट के आधार पर ही शवगृह में सभी गोलियां निकालकर शव परिजनों को सौंप दिया।
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मृतक जीतू की बहन हंस कुमारी के बयान पर 9 लोगों के खिलाफ 120-बी, 302, आर्म्स एक्ट 25, 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया। आरोपियों के लिए छापामारी जारी है।
-विजय कुमार, थाना प्रभारी अंबाला कैंट
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