मुलाना। एसएस जैन स्थानक में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत साध्वी रत्ना सुवृद्धि एवं साध्वी सात्विक के सानिध्य में धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साध्वी रत्ना सुवृद्धि ने अपने प्रवचन में जीवन में संयम, साधना और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में आत्मशुद्धि और आत्म जागरण को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोभ, मोह और क्रोध से दूरी बनाकर ही मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकता है।
अहिंसा, सत्य और करुणा मूल मंत्र
साध्वी सात्विक ने प्रवचन में कहा कि अहिंसा, सत्य और करुणा ही जीवन को सार्थक बनाने के मूल मंत्र हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को सद्गुणों को अपनाने और समाज में प्रेम, भाईचारा तथा शांति का संदेश फैलाने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म का पालन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे आचरण और व्यवहार में उतारना ही वास्तविक साधना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में युवा वर्ग को अध्यात्म की ओर अग्रसर होना चाहिए। मोबाइल और भौतिक सुखों में उलझकर जीवन की मूल दिशा से भटकना सबसे बड़ी भूल है।
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मुलाना के एसएस जैन स्थानक में प्रवचन करतीं जैन साध्वियां। प्रवक्ता