अंबाला। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी देश की प्रगति में अपना योगदान दे रही हैं। ऐसी ही एक कहानी सिंबला गांव की ममता दत्ता की है। घर में पशु पाले जाते थे तो मन में एक इच्छा थी कि खुद व्यापार कर परिवार की आर्थिक मदद करें।
यह सपना तब साकार हुआ जब हरियाणा राजकीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक रिसोर्स पर्सन ने उन्हें महिला स्वयं सहायता समूह की जानकारी दी। इसके बाद ममता ने अपने साथ महिलाओं को जोड़ा और खुशी समूह बनाकर व्यापार शुरू कर दिया। खुद ही नहीं बल्कि उन्होंने अपने समूह की महिलाओं को भी सबल बनाया है।
ममता देसी घी, अचार और मोमबत्ती निर्माण करती हैं। खास बात यह है कि इनके अचार को काफी लोगों ने पसंद किया है। अब इस इसको ऑनलाइन बेचने के लिए एफएसएसआई की प्रमाणिकता भी ले रही हैं।
रहती है बहुत ज्यादा मांग
ममता के स्वयं सहायता समूह खुशी में 10 महिलाएं कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले के देसी घी बनाने का काम शुरू किया था। उनके देसी घी की आसपास के गांव और सरकारी कार्यालयों के स्टाफ में बहुत मांग रहती है। अब वह एक हजार रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से घी की बिक्री करती हैं। कई बार तो देसी घी के आर्डर तक पूरा करना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही वह आम, डेहू, नींबू, मिर्च, अदरक, लहसुन, गाजर, गोभी और मीठे नींबू का आचार भी तैयार करती हैं। जब भी 66 गांव के सखी समूह की बैठक होती है तो उनके पास आचार की सबसे ज्यादा डिमांड आती है। उनके पास आचार 200 रुपये से लेकर 300 रुपये में उपलब्ध है। अचार को वह विभिन्न प्रदर्शनियों में भी स्टॉल के माध्यम से बेचती हैं।
मोमबत्ती के लिए अन्य प्रदेशों से मंगाते हैं सामान
इसके साथ ही वह दो साल से अन्य महिलाओं के साथ मिलकर दिवाली पर मोमबत्ती बना रही हैं। वह पानी में तैरने वाली मोमबत्ती, जैल वाली मोमबत्ती और गिलास वाली मोमबत्ती बनाती हैं। त्योहार पर इन मोमबत्तियों की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है। इसके लिए फिरोजाबाद से गिलास, दिल्ली और यमुनानगर से कच्चा मोम मंगवाती हैं। रक्षाबंधन के बाद से ही वह मोमबत्ती बनाना शुरू कर देती हैं।
गांव सिम्बला में खुशी महिला स्वयं सहायता समूह की ममता दत्ता आचार पैक करते हुए।ं