नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान हुसैनी रोड स्थित आश्रम के सौजन्य से नगर खेड़ा प्रांगण में आयोजित की जा रही पांच दिवसीय श्री राम कथा का समापन हुआ। कथावाचक सर्व साध्वी प्रवीणा भारती ने उपस्थित संगत को लंका दहन प्रसंग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी के बारे में जितना लिखा जाए उतना कम है।
जब हनुमान जी ने श्री राम के आदेश पर लंका में प्रवेश किया तो उन्हें कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। जैसे विशालकाय समुद्र को पार करना, रास्ते में सुरसा के मुंह में से होकर निकलना, फिर लंका के चारों ओर बने सोने के परकोट को लांघने के बद लंकिनी नाम की एक राक्षसी का संहार करना आदि वृतांत सुनाया।
उन्होंने बताया कि जब लंकिनी को मारने की खबर रावण तक खबर पहुंच गई की कोई वानर महल में प्रवेश कर गया है। इसके बाद महल में हनुमान जी विभीषण को राम भक्त जानकर उनसे मुलाकात करते हैं और विभीषण ने जो सूचना दी उसके आधार पर वाटिका में माता सीता को राम की दी हुई अंगूठी देते हैं।
इसके बाद वे अशोक वाटिका का विध्वंस कर देते हैं। इस खबर की सूचना मिलते ही रावण का पुत्र अक्षय कुमार उन्हें मारने के लिए आता है लेकिन हनुमान जी उसका वध कर देते हैं। तब स्वयं मेघनाथ हनुमान जी को पकड़ने के लिए आता हैं। मेघनाथ ने जब हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र चलाया तब उसका सम्मान करते हुए हनुमान जी पेड़ से गिर जाते हैं।
तब मेघनाथ उन्हें नाग पास में बांधकर रावण की सभा में ले जाता है। वहां हनुमान जी के समझाने पर भी रावण श्रीराम की शरण में जाने से इनकार कर देता है। कथा के विराम दिवस पर मुख्य अतिथि गुगल पंडित, हरबिलास रज्जू माजरा, अमित वालिया, रमेश दहिया, धर्मवीर भसीन व अन्य मौजूद रहे। इस अवसर पर भंडारा भी रखा गया।