अंबाला सिटी। विपत्ति किसी भी जीव पर आ सकती है, मगर विपत्ति की परिस्थितियों में जो जीव भगवान का सिमरण कर उसको अपनाकर अपने जीवन में धारण करते हैं वास्तव में वही जीव भगवान की प्राप्ति कर सकता है।
सुख और दुख जीवन का मुख्य आधार मानें जाते हैं इसलिए जब भी परिस्थितियां विपरीत हों, उसका सामना भगवान का आशीर्वाद समझकर ही करना चाहिए। उपरोक्त शब्द अंबाला सिटी के सेक्टर-7 स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रही श्रीराम चरित मानस रामायण पाठ की कथा में कथा व्यास पंडित भगवती प्रसाद पुरोहित ने कहे।
कथा का संचालन समाजसेवी रामगोपाल ने पूजन से किया। इस दौरान पं. धर्मेंद्र गौड़ और पं. त्रिलोचन शर्मा ने मंत्रोच्चारण किया। संगीतमयी गणेश वंदना कर कथा का शुभारंभ करवाया। कथा व्यास ने कहा कि एक बार राजा दशरथ जंगल में शिकार के लिए गए। इस दौरान उन्होंने किसी जानवर के धोखे में श्रवण कुमार को तीर मारकर घायल कर दिया।
राजा दशरथ ने श्रवण कुमार से माफी मांगी, तो श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता के पास जाने के लिए कहकर अपने प्राण त्याग दिए। राजा ने जब श्रवण के माता-पिता को सारा वृतांत बताया तो उन्होंने श्राप दिया कि हमारी तरह तुम भी पुत्र वियोग में तड़प कर प्राण दोगे। ग्रंथों के अनुसार श्राप के कारण ही राजा दशरथ ने श्री राम के वियोग में प्राण त्यागे थे। कथा के समापन पर सभी ने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।