अंबाला सिटी। बाढ़ का गंदा पानी लोगों के लिए नासूर बन गया है। पहले बाढ़ के पानी से बाहर निकलने की जद्दोजहद फिर भोजन-पानी के लिए संघर्ष और अब लोग बीमारियों से लड़ रहे हैं। लोगों को जब चमड़ी व पेट से जुड़ी बीमारियां होने का अंदेशा हुआ तो स्वास्थ्य विभाग ने करीब 90 स्थानों से पेयजल नमूने लिए। इनकी बैक्टीरियल जांच की तो 17 स्थानाें के नमूने फेल हो आए।
इसमें हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए। इसकी रिपोर्ट जब 48 घंटे बाद आई तो स्वास्थ्य विभाग ने तेजी दिखाते हुए इन स्थानों पर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू करा दी। इन 17 स्थानों पर अंबाला शहर के बलदेव नगर सहित उसके आसपास के क्षेत्र व ग्रामीण इलाके हैं। इसमें बलदेव नगर में पानी सबसे खराब स्थिति पाई गई। अभी तक स्वास्थ्य विभाग का रिकॉर्ड देखें तो सबसे अधिक मामले पेट में संक्रमण और चमड़ी रोग से जुड़े सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक 61 अति संवेदनशील क्षेत्रों व शहर के चार वार्डों में 682 स्वास्थ्य शिविर लगाए हैं। जिसमें स्क्रीनिंग करने पर 13594 अलग-अलग बीमारियों से ग्रसित मरीज मिले हैं। इसमें से बुखार के 1509 मरीज, पेट में दर्द के 424, आंखों में जलन में 878 केस शामिल हैं।
साथ ही सबसे अधिक चमड़ी से जुड़े मामले हैं। अभी तक चमड़ी के रोगों से जुड़े 2869 मरीज सामने आ चुके हैं। इन बढ़ते मामलों को लेकर चिकित्सक डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि लोग लंबे समय तक गंदे पानी के संपर्क में रहे हैं। इस कारण से उनमें खुजली या अन्य चमड़ी से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं। इसके अलावा खांसी-जुकाम व अन्य बीमारियों के 2600 मरीज अभी तक सामने आए हैं।
बढ़ रहे सांप काटने के मामले
सांप काटने के मामले भी जिले में दिनों दिन बढ़ रहे हैं। दो दिन पहले यह आंकड़ा 25 था, मगर अब सांप काटने के 35 मरीज सामने आ चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने सभी को बचा लिया है। इसको लेकर सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि सांप काटने के मामलों में देखा जा रहा है कि लोग देसी उपचार का सहारा ले रहे हैं, ऐसा न करें। तत्काल नजदीकी सिविल अस्पताल से संपर्क करें।
डायरिया के मरीजों को अलग कर रहे
स्वास्थ्य विभाग अभी तक डायरिया जैसी शिकायत वाले सभी मरीजों को एक ही श्रेणी में रख रहा था। मगर देखने में मिला कि कुछ मरीजों को वास्तव में बाढ़ के कारण डायरिया हुआ है तो कुछ को गलत खानपान से। ऐस में अब डायरिया की शिकायत लेकर आ रहे मरीजों से आधार कार्ड लिया जा रहा है। जिसमें देखा जा रहा है कि उनके क्षेत्र में जलभराव था या नहीं। अगर बाढ़ का प्रभाव था तो वह निश्चित तौर पर गंदा पानी पीने से बीमार हुए हैं।
प्रशासन ने नौ मौतें बाढ़ में चिह्नित कीं
उपायुक्त डॉ. शालीन ने वीरवार को बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि राज्य सरकार की ओर से बारिश व जलभराव के चलते जहां पर लोगों की मृत्यु हुई हैं, उन्हें चार लाख रुपये प्रति अनुदान देने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में भी नौ लोगों की मृत्यु दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि जिसकी भी मृत्यु बाढ़ के कारणों के चलते हुए हुई, उनके परिजन दस्तावेज संबंधित बीडीपीओ कार्यालय या एसडीएम कार्यालय में औपचारिकताएं पूरी करते हुए देना सुनिश्चित करें। इन केसों के लिए जो मुआवजा राशि दी जानी है वे राज्य सरकार से प्राप्त हो चुकी है।