अंबाला। महिला दिवस पर पहली बार मालगाड़ी का संचालन महिला रेलकर्मियों की टीम ने किया। इसमें लोको पायलट मनोरमा वर्मा, सहलोको पायलट कृति शर्मा और ट्रेन मैनेजर मनीषा कुमार मौजूद रहीं।
तीनों ने मालगाड़ी को अंबाला कैंट से लेकर लुधियाना तक पहुंचाया। सहायक मंडल रेल प्रबंधक हनुमान प्रसाद ने बताया कि पिंक डे यानी की महिला दिवस पर अंबाला मंडल ने पहली बार मालगाड़ी की कमान महिला कर्मचारियों को दी है। उन्हें जिम्मेदारी सौंपने से पहले कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।
58 कोचों में लदा था कोयला
सहारनपुर की तरफ से मालगाड़ी के लिए पुरुष कर्मचारियों का दल सुबह 10:40 बजे कैंट रेलवे स्टेशन की लाइन नंबर आठ पर पहुंचा था। अंबाला से मालगाड़ी की कमान तीनों कर्मचारियों के सुपुर्द की गई। इंजन की कमान मनोरमा और कृति ने संभाली तो मालगाड़ी के अंत में लगे गार्ड केबिन की जिम्मेदारी मनीषा ने संभाली। लगभग 58 कोच की मालगाड़ी में कोयला था, जिसे बठिंडा के थर्मल प्लांट भेजना था।
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परिवार झांसी में है। पिता भी रेलवे में लोको पायलट थे और पति भी लोको पायलट हैं। उनकी प्रेरणा से ही रेलवे में नौकरी करने का मौका मिला है। 11 साल से रेलवे की सेवा कर रही हूं। महिला दिवस पर रेलवे ने उन्हें मालगाड़ी की कमान सौंपी है जोकि एक यादगार सफर रहेगा। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।
मनोरमा, लोको पायलट।
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परिवार सहारनपुर में हैं। रेलवे में नौकरी करना सपना लगता है। दिल में इच्छा थी कि महिलाएं हवाई जहाज चला सकती हैं तो ट्रेन क्यों नहीं चला सकती। शुक्रवार को महिला दिवस पर यह सपना भी साकार हो गया। मन में थोड़ा बहुत डर था जो वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन से दूर हो गया है। अब गंतव्य तक पहुंच कर ही दम लेंगे।
कृति शर्मा, सह लोको पायलट।
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राजस्थान के हनुमानगढ़ में पली-बड़ी हुई हूं। प्रशासनिक सेवा के लिए पेपर दिया था। लेकिन वहां कामयाबी नहीं मिली। फिर दूसरे विभागों सहित रेलवे में आवेदन किया तो लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद सह लोको पायलट की नौकरी दिसंबर 2023 में मिल गई। यह पहला सफर है जब किसी मालगाड़ी की जिम्मेदारी मिली है। भगवान से प्रार्थना है कि यह सफर सुरक्षित रहे और कोई विघ्न न आए।
मनीषा कुमारी, ट्रेन मैनेजर।
वर्जन
घर और कार्यस्थल की जिम्मेदारी संभालना बेहद मुश्किल काम है। लेकिन महिलाएं इस कार्य को बखूबी निभा रही हैं। इसमें परिवार और सह कर्मियों का सहयोग हमेशा सर्वाेपरि है। अगर इस दौरान दोनों जगह से सहयोग न मिले तो फिर हालात बद से बदतर हो जाते हैं। रेलवे में नौकरी करने से जो सम्मान मिला है, वो हमेशा यादगार रहेगा।
रितिका वशिष्ठ, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।