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Ambala News: किसानों का संघर्ष, चंडीगढ़ कूच को हाईवे पर डटे रहे

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अंबाला। चंडीगढ़ कूच करने के लिए किसानों को अंबाला-हिसार बाईपास पर संघर्ष करना पड़ा। किसानों को रोकने के लिए पुलिस सुबह से ही तैयार थी। पुलिस ने हर किलोमीटर पर हाईवे पर बेरिकेड लगाए, जिससे कि किसानों को रोका जा सके।
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यहां 50 से अधिक किसानों को ट्रैक्टर से उतारकर हिरासत में ले लिया और नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद किसान डटे रहे। वे अंबाला-हिसार बाईपास स्थित गांव जमीतगढ़ में डेरा डालकर बैठ गए। यहां पुलिस और प्रशासन के अधिकारी किसानों से उठने के लिए कहते रहे, लेकिन वे अड़े रहे।
बहरहाल, समाधान नहीं मिलने पर किसानों ने पैदल ही चंडीगढ़ की ओर चलना शुरू कर दिया। उन्हें पुलिस ने फिर रोक लिया। देरशाम तक पुलिस प्रशासन और किसानों के बीच बात चलती रही, मगर कोई हल नहीं निकला। किसानों की दो मांग थी कि एक तो उन्हें चंडीगढ़ जाने दिया जाए, दूसरा हिरासत में लिए उनके साथियों को छोड़ा जाए। पुलिस प्रशासन की सतर्कता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर आईजी सिवास कविराज और एसपी जशनदीप सिंह रंधावा स्थिति संभालते रहे।
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सुबह ही उठा लिए थे कई किसान

किसानों की मांग थी कि बाढ़ से हुए नुकसान पर उन्हें विशेष मुआवजा दिया जाए। इसके लिए वह मंगलवार को चंडीगढ़ कूच करने निकले थे। मगर पुलिस पहले से तैयार थी। ऐसे में चंडीगढ़ जाने वाले प्रत्येक रास्ते पर पुलिस ने पहले से ही बेरिकेड लगा दिए गए। यहां पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। इसके बाद जो किसान ट्रैक्टर से जिस जिस नाके पर पहुंचे वहां पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और लौटने की बात न मानने पर उन्हें हिरासत में ले लिया। सभी को शहर की पुलिस लाइन में एक हॉल में भेज दिया। इसमें शंभू टोल प्लाजा, कालका चौक और सद्दोपुर भी शामिल रहे।

किसानों ने जमीतगढ़ में बनाई रणनीति

जब पुलिस ने किसानों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में ले लिया। इसके बाद किसानों सुबह 10 बजे करीब नई रणनीति बनाते हुए अंबाला हिसार बाईपास पर गांव जमीतगढ़ में मुख्य राजमार्ग पर डेरा डाल दिया। इस कारण एक तरफ का रास्ता बाधित हो गया। चंडीगढ़ से हिसार और हिसार से चंडीगढ़ जाने वाले लोग एकल मार्ग से ही आने-जाने लगे। यहां एसपी जश्नदीप रंधावा किसानों को समझाने पहुंचे तो किसान कहने लगे कि उनके साथियों को छोड़ दिया जाए। उन्हें तो राजधानी चंडीगढ़ जाना है। मगर एसपी के लाख समझाने पर भी किसान नहीं माने और रास्ता नहीं खाली किया। गांव जमीतगढ़ का कुछ क्षेत्र पंजाब में भी पड़ता है। ऐसे में यहां पर पंजाब पुलिस मोर्चा संभालती दिखी। यहां पर भारतीय किसान मजदूर संगठन सुरेश कोथ, भाकियू शहीद भगत सिंह प्रदेश प्रवक्ता तेजबीर सिंह पंजोखरा और बजिंद्र सिंह मुख्य रूप से नजर आए।

दोपहर बाद पैदल चंडीगढ़ कूच



दोपहर चार बजे तक जब पुलिस-प्रशासन से कोई समाधान नहीं निकला तो किसानों ने पैदल ही चंडीगढ़ चलना शुरू कर दिया। किसान यहां से पैदल चले तो पुलिस अलर्ट हाे गई और अंबाला चंडीगढ़ राजमार्ग पर डंपर और ट्रक लगाकर रास्ता रोका। इसके साथ ही किसानों को रोकने के लिए पुलिसकर्मी सड़क के बीचोंबीच मानव शृंख्ला बनाकर खड़े हो गए, उनके पीछे वाटर केनन से लैस गाड़ियां तैनात कर दी गईं। एसडीएम सिटी दर्शन सिंह ने किसानों को समझाने की असफल कौशिश की।
डीसी ने भी किसानों को समझाया

एसडीएम के बाद डीसी डॉ. शालीन भी शाम को मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बात की। हिसार से आए किसान नेता सुरेश कोथ ने डीसी से कहा कि उनकी मांग है कि केंद्र सरकार में किसी सक्षम मंत्री से उनकी बात कराई जाए। बाढ़ में जिस किसान की जान गई है उन्हें 10 लाख रुपये मुआवजा मिले, गिरफ्तार किसानों को छोड़ा जाए, जो किसान घायल हुआ उसका सरकार इलाज कराएं।
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