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किसानों ने किया अर्धनग्न प्रदर्शन

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अंबाला सिटी। किसानों ने भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के आह्वान पर अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने देह शामलात जुमला मालकान जमीनों का मालिकाना हक देने व गिरदावरी कराने के साथ-साथ छह माह तक बैंकों की किस्त स्थगित कराने की मांग की। किसानों ने सरकार की ओर से दिए गए आदेशों की प्रतियों को भी आग लगाते हुए जमकर विरोध किया। उन्होंने मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
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किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिलने पर भारी पुलिस मौके पर मुस्तैद रहा और स्थिति पर निगरानी रखी। किसानों का कहना है कि अगर सरकार जल्द ही अपने फैसले वापस नहीं लेते है तो उन्हें मजबूरी में कोई बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। किसानों ने मांग की है कि इस बार किसानों की फसल बारिश में खराब हो गई है। इस कारण किसानों को बहुत अधिक नुकसान हुआ है। स्थिति यह है कि बहुत से किसानों की तो कई एकड़ फसल एक साथ खत्म हो गई है। ऐसे में उनके पास अब आय का भी कोई साधन नहीं है। मुख्य रूप से उन किसानों पर दोहरी मार पड़ी है जो किराए की भूमि पर अपनी फसल लगाते थे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जल्द ही विशेष गिरदावरी नहीं करवाती है और किसानों को मुआवजा नहीं देती है तो वह अनिश्चित कालीन हड़ताल पर विचार करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
किसान कहां जाएंगे
किसानों की फसलें बारिश में पूरी तरह से खराब हो गई हैं। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर किसान कहां जाएंगे। मजबूरी में सरकार के समक्ष हमें विशेष गिरदावरी की मांग रखनी पड़ रही है।
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- सरजीत सिंह, किसान।
मजबूरी में किया प्रदर्शन
किसानों की फसल किस तरह से बारिश में खराब हुई है, सरकार को खुद ही एलान करना चाहिए था। अभी तक सरकार ने कोई एलान नहीं किया है तो हमें मजबूरी में प्रदर्शन करने का निर्णय लेना पड़ रहा है।
- गुलाब सिंह, किसान।
...तो करते रहेंगे प्रदर्शन
सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश कहते हुए शामलात जमीनों को लेने में लगी है। सरकार को शामलात जमीनों को पहले जैसी स्थिति में ही रहने देना चाहिए। अगर बात नहीं मानी तो ऐसे ही प्रदर्शन करते रहेंगे।
-किरपाल सिंह, किसान।
जायज मांगे माने सरकार
सरकार को चाहिए कि किसानों की सभी जायज मांगों को तुरंत मान ले, ताकि किसानों को प्रदर्शन करने के लिए मजबूर न होना पड़े। जब तक मांगे नहीं मान लेती, हमारा प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा।
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- रमेश राणा, किसान।
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