अंबाला सिटी की अनाजमंडी में बैठक करते किसान। संवाद
बैठक में बोले, उनकी जमीन से मिट्टी उठाई तो देना होगा 20 प्रतिशत हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। नदियों से ठेकेदारों की ओर से नियम ताक पर रखकर उठाई जा रही मिट्टी पर किसान भड़क गए हैं। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) ने नई अनाज मंडी में एकत्रित होकर इसका विरोध किया। विभिन्न गांवों के किसानों ने सरकार की नीतियों को पक्षपातपूर्ण बताया। किसानों ने कहा कि यदि उनकी जमीन से मिट्टी उठाई जाती है, तो उन्हें कुल मूल्य का 20 प्रतिशत हिस्सा दिया जाए, अन्यथा काम नहीं होने देंगे।
यूनियन के राज्य प्रधान अमरजीत सिंह मोहड़ी और जय सिंह जलबेड़ा ने बताया कि जिले के गांव ललाना व आसपास के क्षेत्रों में टांगरी नदी से मिट्टी उठाई जा रही है। किसानों का आरोप है कि ठेकेदार उनकी सहमति के बिना खेतों में खुदाई कर रहे हैं। मोहड़ी ने कहा, किसानों की कृषि भूमि से मिट्टी उठाना उनकी आजीविका पर सीधा हमला है। किसान नेता जय सिंह जलबेड़ा ने कहा कि खेती ही किसान की आय का एकमात्र साधन है। अगर बाढ़ से इसे नुकसान हुआ या मिट्टी की अवैध लूट नहीं रुकी, तो किसान बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
बांध टूटने और बाढ़ का खतरा
किसान नेताओं ने तकनीकी खामियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने नदी की सफाई का काम वैज्ञानिक ढंग से करने के बजाय एक ही ठेकेदार को सौंप दिया है। नियम के मुताबिक मिट्टी नदी के बीच से उठाई जानी चाहिए, लेकिन ठेकेदार किनारों से खुदाई कर रहे हैं। इससे नदी के बांध कमजोर हो रहे हैं। जिससे आगामी मानसून में गांव के डूबने और फसलें बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। ललाना ग्राम पंचायत के सरपंच और किसान यूनियन ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। किसानों ने अपनी मुख्य मांगों के बारे में बताया कि जिस किसान के खेत से मिट्टी उठे, उसे प्रति एकड़ 20 प्रतिशत हिस्सा मिले। खुदाई के बाद नदी के किनारों को पत्थर या मजबूत मिट्टी से ऊंचा किया जाए। नियमों के विरुद्ध हो रही खुदाई पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हो।