अंबाला सिटी। मंडियों में इन दिनाें नमी के साथ- साथ काले धान का साया भी किसानों पर मंडरा रहा है। काले धान में फंगस लगने के कारण धान का रंग भी काला पड़ गया है।
इससे किसानों को 150 रुपए से लेकर 200 रुपये तक का कट झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही काले धान में नमी का कट भी अलग से देना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इस प्रकार प्रति क्विंटल उन्हें 300 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है लेकिन अभी तक न तो एजेंसी और न ही सरकारी अधिकारियों ने उनकी सुध ली है।
राइस मिलर्स का कहना है कि काले धान में चावल की मात्रा बहुत कम होती और चावल का रंग भी हरा होता है। इससे उन्हें नुकसान होता है। इधर, नमी जांचने वाले मीटर में भी किसानों के संशय बना हुआ है। एजेंसी के मशीनों और राइस मिलर्स की मशीनों में एक से दो अंकों का अंतर मिलता है।
हालांकि किसानों ने इस बारे में अभी तक कोई शिकायत नहीं दी है लेकिन इससे बेहतर गुणवत्ता वाले धान में भी कट लगाया जा रहा है। जिसका खामियाजा किसानों को ही भुगतना पड़ रहा है।
इस वर्ष परेशानी अधिक
किसान गुलजार सिंह ने बताया कि बीते वर्ष फसल कम हुई थी लेकिन कालेपन की समस्या नहीं थी। इस वर्ष ही धान में फंगस की समस्या आई है। इससे बहुत नुकसान हो रहा है।
नमी का कट भी लग रहा
बलाना के रहने वाले किसान सुखबीर ने बताया कि काले धान में फंगस के कारण 200 रुपये कट तो लग ही रहा है। इसके साथ- साथ नमी का कट भी देना पड़ रहा है। इसलिए किसानों को हजारों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कट से परेशानी बढ़ी
तुरकड़ा निवासी किसान रणदीप सिंह ने बताया कि धान की खरीद और उठान में तो अब कोई समस्या नहीं है लेकिन नमी के कारण बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके साथ ही अब फंगस की समस्या भी अलग मुसीबत बन गई है।
हमारी ओर से काले धान की खरीद नहीं होती है। इसलिए किसान अपने स्तर पर ही उस धान को बेच सकते हैं। इसके साथ ही नमी का स्तर भी 17 अंक पर निर्धारित किया गया है। 17 अंक पर एमएसपी का मूल्य दिया जा रहा है। अन्य नमी स्तर पर धान की खरीद नहीं होती।
मिनाक्षी गर्ग, निरीक्षक डीएफएससी अंबाला सिटी।
बलाना के रहने वाले किसान सुखबीर
बलाना के रहने वाले किसान सुखबीर
बलाना के रहने वाले किसान सुखबीर