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Ambala News: गोवंश पर किसान और पुलिस झड़प, विधायक निवास पर प्रदर्शन

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अंबाला सिटी। 10 महीने बाद भी बेसहारा गोवंश का समाधान नहीं करने पर भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह ने प्रशासन के खिलाफ मंगलवार को मोर्चा खोल दिया। जब सुबह से दोपहर तीन बजे तक भी कोई समाधान नहीं निकला तो किसान ट्राॅलियों में भरे गोवंश को लेकर शहर की तरफ बढ़े। इससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
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नई अनाज मंडी के गेट पर गोवंश से भरी ट्राॅलियों को रोकते समय भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के किसानों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हो गई। यहां पुलिस किसानों को रोकने में नाकाम रही और किसान ट्राॅलियों से भरे गोवंश को लेकर शहर विधायक असीम गोयल के निवास पर पहुंच गए। यहां पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सड़क के बीच में नाका और गाड़ियां लगा दीं। कई किसानों ने सड़क के बीच लगी पुलिस की गाड़ियों को उठाकर साइड में करने की कोशिश की और नाके भी हटा दिए।
इसके बाद किसान विधायक निवास के बाहर पशु लेकर पहुंच गए। दोपहर करीब 3:30 बजे किसानों ने विधायक निवास पर धरना शुरू किया। यहां भी किसानों और पुलिस में नोकझोंक हो गई। किसानों के प्रदर्शन के कारण सड़कें दोनों ओर से जाम हो गई। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस अधिकारी रामकुमार और एसडीएम दर्शन कुमार ने यूनियन नेता अमरजीत सिंह मोहड़ी, जय सिंह जलबेड़ा से बात की। इसके बाद एक तरफ का रास्ता खुल पाया। किसानों का प्रदर्शन देररात तक जारी रहा।
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बता दें कि किसानों ने फरवरी में भी बेसहारा गोवंश को ट्राॅलियों में भरकर शहर नई अनाज मंडी में प्रदर्शन किया था। किसान गोवंश के लिए डीसी ऑफिस में पहुंच गए थे। तब प्रशासन ने देररात में बेसहारा गोवंश को गोशाला में छुड़वा दिया था और मांगों का जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं किया।
कई बार की बातचीत, नहीं निकला हल

सुबह 11 बजे किसान शहर नई अनाज मंडी में जिले भर से गोवंश ट्राॅलियों में लादकर पहुंचे थे। कई किसानों ने ट्राॅलियों को गुब्बारे लगाकर सजाया था। इस मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने पहले किसानों के साथ बातचीत की। किसानों की मांग थी कि वह ट्राॅलियों में भरकर गोवंश को लेकर आए हैं। वह प्रशासन की बताई छह गोशाला में इन गोवंशों को छोड़ने के लिए तैयार हैं। मगर उनको प्रति पशु 1570 रुपये प्रशासन नगर निगम के टेंडर के अनुसार दे, जिससे कि इन गोवंश को ग्रामीण एरिया से पकड़ने और उनको गोशाला तक छोड़ने में जो खर्च आएगा, वह किसानों को मिल सके।
यूनियन को प्रति गोवंश पैसा देने से प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। यूनियन का यह भी कहना था कि जो लोग बेसहारा गोवंश के कारण सड़क हादसे में घायल हुए हैं या जान गवां चुके हैं, उनको मुआवजा दिया जाए और प्रशासन इसकी जिम्मेदारी ले। यहां शहर एसडीएम दर्शन कुमार भी कई बार यूनियन से बातचीत के लिए पहुंचे, मगर यूनियन नेता प्रति पशु के हिसाब से पैसे देने की मांग पर अड़े रहे। यूनियन ने प्रशासन को भी खुद गोवंश को गोशाला तक छोड़ने के लिए कहा, लेकिन प्रशासन कोई हल नहीं निकाल पाया।
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह ने प्रशासन को प्रदर्शन के लिए चेतावनी दी थी। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पहले बैठक भी हुई थी। यह बैठक बेनतीजा रही थी। किसान जिले भर से 26 से ज्यादा ट्रालियों में करीब 200 गोवंश लेकर नई अनाज मंडी शहर में पहुंच गए। दोपहर बाद वंदे मातरम् दल के प्रधान भरत सिंह के नेतृत्व में दल सदस्यों ने इन गोवंश को चारा खिलाया। गोवंश सेवक मोनू चावला भी अपने साथियों के साथ बेसहारा गोवंश को चार खिलाने के लिए पहुंचे। देर रात तक गोवंश से लदी ट्रालियां लेकर किसानों ने विधायक निवास पर प्रदर्शन किया।
इस तरह चला घटनाक्रम
सुबह 11 बजे किसान शहर की नई अनाज मंडी में पहुंचने शुरू हुए।
दोपहर तीन बजे तक ड्यूटी मजिस्ट्रेट व एसडीएम दर्शन कुमार के साथ यूनियन नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी, जिला प्रधान गुरमीत सिंह माजरी, जय सिंह जलबेड़ा, सुखविंद्र सिंह जलबेड़ा, मनजीत मच्छौंडा सहित अन्य नेताओं के साथ बातचीत हुई, मगर कोई हल नहीं निकल सका।
दोपहर करीब 3.26 मिनट पर किसान गोवंश से भरी ट्रालियां लेकर मंडी से निकलने लगे तो पुलिस ने मंडी के गेट पर यूनियन की गाड़ी को रोक लिया, यहां पुलिस व किसानों के बीच धक्कामुक्की हो गई।
किसान यहां से ट्रालियां लेकर शहर की तरफ बढ़े और शहर विधायक असीम गोयल के निवास पर पहुंच गए, यहां भी पुलिस ने सड़क पर नाका लगा दिए और अपनी गाड़ियां भी लगा दी, मगर किसान अपनी ट्रालियां लेकर विधायक असीम गोयल के निवास के बाहर पहुंच गए। यहां भी पुलिस व किसानों के बीच नोकझोंक हो गई। यहां काफी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन होने से जाम भी लग गया। बाद में एक तरफ का जाम खुलवाया गया।
यहां किसान दोपहर करीब 3.57 मिनट पर बैठे और देर रात तक किसानों का धरना जारी रहा। प्रशासनिक अधिकारी यूनियन नेताओं से देर रात तक बातचीत करने में लगे थे।
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