अंबाला। जिस पीले सोने (धान) को किसान पिछले छह महीने से अपनी मेहनत के पसीने से सींच रहा था रविवार को अचानक हुई बरसात में वह पानी में बहता नजर आया। मंडियों में बिखरे अपने धान को बचाने के लिए किसान दौड़कर तिरपाल तलाशते रहे। फिर भी बरसात ने 70 फीसदी फसल को गीला कर दिया। इससे न केवल धान को भारी नुकसान होगा बल्कि किसानों की जेब पर भी असर पड़ेगा। किसानों ने स्थिति के लिए सीधे तौर पर शासकीय बंदोबस्त को जिम्मेदार ठहराया। ज्यादातर किसानों का आरोप है कि अनाज मंडी में बरसात से फसल बचाने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हैं। सरकारी खरीद में देरी से भी किसान बेहद नाराज हैं। फिलहाल किसान मौसम के बदले तेवरों को लेकर बेहद परेशान हैं। उनकी दिक्कत मंडी में पड़ी व खेत में खड़ी फसल को लेकर है। अगर फिर बरसात हुई तो किसानों का कर्ज में फिर डूबना तय है।
मंडियों में पहुंचा 1.50 लाख क्विंटल धान
जिले की अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी। लेकिन ज्यादातर मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है। अंबाला सिटी की अनाजमंडी में 60 हजार क्विंटल से ज्यादा धान पहुंच चुका है। जबकि जिले की दूसरी मंडियों में कुल मिलाकर इससे पहले धान की आवक हो चुकी है। रविवार को सिटी अनाज मंडी में किसानों ने अपने धान को सूखाने के लिए फड़ पर डाला हुआ था। लेकिन अचानक हुई बरसात से किसानों में अफरा तफरी मच गई। तेज बरसात से बचाने के लिए किसान जमीन पर बिखरे सोने को समेटते दिखे। फटी तिरपालों से धान को बचाने की खूब कसरत हुई। फिर भी ज्यादातर किसानों का धान पानी में भीग गया। अब पानी से गीला होने के कारण किसानों की मुसीबत बढ़ गई। क्योंकि गीले या फिर नमी वाले धान को खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं होता।
गेहूं की बोरियों से भरा पड़ा है शेड
अनाजमंडी में धान को बरसात से बचाने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं है। सिटी अनाजमंडी के एक शैड में तो गेहूं की पांच लाख बोरी भरी पड़ी हैं। धान का सीजन शुरू हो चुका है मगर हैफेड की ओर से इस गेहूं का उठान शुरू नहीं हो पाया है। शनिवार को आढ़तियों ने इसका जमकर विरोध किया था। मगर शेड खाली होने में अभी कई दिन लग सकते हैं। किसानों के मुताबिक अगर मंडी के शेड खाली हो तो बरसात से धान को बचाया जा सकता था। मगर अधिकारियों की लापरवाही का सीधा उन्हें नुकसान हो रहा है।
किसान जगतार सिंह ने कहा कि मैं तीन दिन से मंडी में हूं। अभी तक धान की खरीद शुरू नहीं हुई है। फसल बेचने के चक्कर में ही मुझे यहां ठहरना पड़ रहा है। अगर धान की खरीद जल्द शुरू होती तो शायद उसकी फसल को बरसाती पानी से नुकसान न होता।
किसान महिंद्र सिंह मंडी में बरसात से फसल को बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। रविवार को बरसात से अपनी फसल बचाने के लिए सभी किसानों को फटी पुरानी तिरपालों का मदद लेनी पड़ी। इस वजह से उनकी फसल पानी से भीग गई। फसल को बेचना अब उनके लिए मुश्किल हो गया है।
किसान मनी राम सरकार की ओर से हर बार मंडियों में फसलों को मौसम की मार से बचाने के लिए पुख्ता बंदोबस्त के झूठे दावे किए जाते हैं। मगर हर बार किसान को नुकसान उठाना पड़ता है। रविवार को भी अचानक हुई बरसात ने उनकी छह महीने की मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसान सोहन सिंह ने बताया कि मैं दो दिन से अपनी फसल बेचने के लिए मंडी में हूं। अभी मुझे अपनी फसल बेचने के लिए आठ दिन इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि सरकार के आदेश पर एक अक्तूबर से ही धान की खरीद शुरू होगी। ऐसे में मौसम की मार से नुकसान झेलना हमारी मजबूरी है।
किसान गुरलाल सिंह ने बताया कि को तो हमेशा ही सरकार की लापरवाही का शिकार होना पड़ा है। मंडियों में कई दिन से धान की आवक शुरू हो चुकी है। मगर सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है। ऐसी स्थिति में धान की सरकारी खरीद पहले होनी चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके।
किसान लाभ सिंह ने बताया कि मंडियों मेें किसानों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। दिन रात किसान मक्खी मच्छरों व मौसम की मार झेलने को मजबूर हैं। न पीने के पानी की व्यवस्था है न ही शौच के लिए। मुश्किल हालात में ही किसान मंडियों में अपनी फसल बेच पाते हैं।