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भाकियू प्रधान बोले, जो गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में डालेगा खलल वह नहीं किसान

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गणतंत्र दिवस पर अंबाला के छह हजार ट्रैक्टरों पर करीब 60 हजार किसान दिल्ली में आज अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, किसान आंदोलन के चलते आज प्रशासन और किसान दोनों के संयम की परीक्षा भी होगी। किसानों ने गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में खलल नहीं डालने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों की आड़ में असामाजिक तत्वों की प्रशासन को चिंता सताए जा रही हैं।
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दूसरी तरफ कृषि कानूनों के विरोध में अंबाला से दिल्ली बार्डर पर जाने के लिए ट्रैक्टरों का काफिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को भी शंभू बार्डर पर पंजाब की ओर से हजारों किसानों ने राशन पानी लेकर दिल्ली की चढ़ाई जारी रखी। अंबाला की बात करें तो शनिवार को करीब 4 हजार ट्रैक्टरों का काफिला दिल्ली पहुंच चुका है। सोमवार को भी अंबाला जिला से करीब ढाई हजार से अधिक ट्रैक्टरों का काफिला दिल्ली में होने वाली एतिहासिक परेड में शामिल होने के लिए देर शाम तक जाता दिखा। परेड में शामिल होने जा रहे किसानों ने बताया कि दिल्ली में होने वाली ट्रैक्टर परेड महज एक परेड नहीं है, यह किसानों के साथ साथ हर आम और खास के हक की लड़ाई है। जिसे केवल किसान ही लड़ रहा है। बीते करीब दो माह से किसान खून जमा देने वाली ठंड में दिल्ली बार्डर पर डटे हुए हैं। वहीं, इस दौरान करीब 6 दर्जन किसानों ने अपनी जान की आहुति तक दे दी है। ऐसे में हम अपने कुर्बान हुए किसान भाइयों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। हम तब तक सरकार से लड़ेंगे तब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है।
जो गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में डालेगा खलल वह किसान नहीं : मलकीत सिंह
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान मलकीत सिंह ने कहा है कि हमने सभी किसानों से अपील की है कि कोई भी किसान गणतंत्र दिवस के किसी कार्यक्रम में कोई भी बाधा न डाले। अगर इसके बाद भी कोई ऐसा करता है वह उसकी स्वयं की जिम्मेवारी होगी और वह किसान नहीं होगा, क्योंकि कोई भी किसान देश हित को सर्वोपरी लेता है।
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गांव गोबिंदगढ़ भी नहीं आंदोलन में किसी से पीछे : दलबीर सिंह
शंभू बार्डर पर पूरी तरह से सक्रीय किसान गांव गोबिंदगढ़ के किसान दलबीर सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव वासियों के सहयोग से अपने गांव से कुल 5 ट्रैक्टर व 60 हजार रुपये की राशि आंदोलन के लिए भेजी है। आगे भी उनसे जितना सहयोग होगा वह करेंगे।
पूरे का गांव का मिल रहा है सहयोग : मस्तान सिंह
गांव ठरवा के सरपंच मस्तान सिंह ने बताया कि आंदोलन में पूरे गांव सहयोग मिल रहा है। हर गांव वासी अपनी ओर से पूरी मदद आंदोलन में कर रहा है। वहीं, गांव के करीब 100 लोग दिल्ली बार्डर पर डटे हुए हैं और आंदोलन जारी रहने तक ऐसे ही वह अपना सहयोग देते रहेंगे।
गांव तेजां का हर किसान आंदोलन में सक्रीय : काला
मेरे गांव से गांव वासियों ने मुझे आश्वस्त किया है कि किसान आंदोलन में किसी भी तरह की किसी भी चीज की कोई जरूरत हो तो हम आपका पूरा सहयोग करेंगे। गांव के अधिकतर लोग चाहे वह किसान हो या मजदूर हर व्यक्ति आंदोलन में सक्रीय है।
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