बैंक से कृषि ऋण लेने के बाद किसान द्वारा कागजों पर अंग्रेजी की बजाए हिंदी में साइन करना महंगा पड़ गया। अदालत ने किसान को एक साल की सजा सुनाई है। इस संबंध में अदालत में बैंक प्रबंधन द्वारा शिकायत दायर की गई थी। मामला क्षेत्र के गांव कुराली से संबंधित है।
बैंक प्रबंधन ने अपने प्रबंधक की मार्फत एक शिकायत धारा-138 एनआई एक्ट के तहत स्थानीय अदालत में मार्च 2012 में दायर कर दी। लगभग चार साल चले इस मुकदमे में जो तथ्य उभर कर आए उसमें यह साबित हो गया कि किसान ने जानबूझकर उक्त चेक पर हिन्दी में हस्ताक्षर किए थे जबकि ऋण लेते समय अन्य कागजात पर उसके द्वारा अंग्रेजी में अपने हस्ताक्षर किए हुए थे। बैंक के वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वजीत गुलयानी ने बताया कि बैंक प्रबंधन द्वारा दायर की गई इस शिकायत पर अदालत ने किसान को दोषी ठहराते हुए एक साल कारावास की सजा सुनाई है।