अंबाला। आमजन की जीवनदायिनी कही जाने वाली भारतीय रेल में अवैध वसूली का खेल चल रहा है। यहां सफर कर रहे श्रमिकों को अनधिकृत सामान बेचकर खेल किया जा रहा है। इसका खुलासा पूर्णिया बिहार से चलकर अमृतसर की तरफ जाने वाली ट्रेन नंबर 14617 जनसेवा एक्सप्रेस में नजर आया।
यात्री फर्श पर और सामान सीटों पर
शुक्रवार दोपहर को लगभग डेढ़ बजे ट्रेन अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर पहुंची तो यहां आधे से ज्यादा कोच की सीटों पर पैंट्री कर्मचारियों ने कब्जा किया था और आधे पर खाने और पीने का सामान रखा था। जबकि यात्री फर्श पर बैठकर सफर कर रहे थे। ऐसे हालात देखकर लग रहा था कि पैंट्री कर्मचारियों की मनमानी के आगे यात्री भी नतमस्तक हैं। हैरानी की बात है कि 700 किमी का सफर करने के बाद अंबाला पहुंची ट्रेन को बीच रास्ते किसी भी रेलवे स्टेशन पर चेक करने की कोशिश नहीं की।
नहीं मिला रेल नीर, जनता खाना 40 का
जनसेवा में तैनात पैंट्री मैनेजर कलटन कामत ने बताया कि रेल नीर की कमी चल रही है। इसलिए दूसरे ब्रांड का पानी बेच रहे हैं। इसकी जानकारी कई बार अधिकारियों को दे चुके हैं। जब सीट पर रखे सामान के बारे में पूछताछ की तो कोई जवाब नहीं मिला। हालात एक दिन के नहीं बल्कि रोजाना के हैं। इसी प्रकार अमृतसर से वापसी के दौरान ट्रेन नंबर 14618 में भी ऐसे ही हालात होते हैं। यात्री दरवाजों पर लटककर सफर कर रहे होते हैं और पैंट्री कर्मी बड़े आराम से अनधिकृत सामान बेचकर और सीटों पर कब्जा करके मुनाफा कमा रहे होते हैं। वहीं इस दौरान अनधिकृत ब्रांड की बोतल भी 20 रुपये में और जनता खाना 40 रुपये में बेचा जा रहा था।
पहले भी किया था खुलासा
जनसेवा एक्सप्रेस में पैंट्री कर्मचारियों की मनमानी का यह खेल नया नहीं बल्कि काफी पुराना है। लगभग तीन माह पहले भी अमर उजाला की टीम ने इस ट्रेन में चल रहे खेल का खुलासा किया था। इसके बाद रेलवे ने कुछ समय तक सख्ती की थी, बावजूद इसके अब एक बार फिर व्यवस्था पुराने ढर्रे पर आ गई है। जबकि भीषण गर्मी में यात्री बेहाल हैं और धक्के खाते हुए ट्रेन में सफर करने को मजबूर हैं।
वर्जन
ट्रेन दूसरे मंडल के अधीन है। इसकी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजी जाएगी, जिससे कि नियमों की अनदेखी करने वाले पैंट्री संचालन के खिलाफ कार्रवाई हो सके। वैसे इसे अपने स्टेशन पर चैक करवाया जाएगा और जो भी कार्रवाई बनेगी वो की जाएगी।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।