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मां का मिला साथ तो बेटी ने रॉलर और हॉकी स्केटिंग में बनाई पहचान

Thu, 22 Oct 2020 02:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला
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दीक्षा - फोटो : अमर उजाला
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हजार बिजली गिरें, लाख आंधियां उठे वो फूल खिलकर ही रहेंगे जो खिलने वाले हैं। अंबाला शहर से सटे गांव जलबेहड़ा की दीक्षा पर यह पंक्ति एकदम फिट बैठती है। बेटी होते हुए भी दीक्षा ने उस खेल को न केवल खेला बल्कि दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया जिसमें भाई पहले ही पायदान में गिर गए। दीक्षा ने भाई के वही स्केट्स लिए और शुरू कर दिया अपने जीवन का सफरनामा। मध्यम वर्गीय परिवार होने के कारण दादा ने पौती के रॉलर स्केटिंग और रॉलर हॉकी स्केटिंग खेल पर रोक लगा दी। शर्तें रखी या तो मां खेल में साथ रहेगी या खेल नहीं खेलेगी।
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रात 12 बजे तक सड़क को बनाया मैदान....
स्कूल लेवल से लेकर जिला और फिर राज्य से लेकर राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता जहां भी हुई मां अनिता रानी हर दम साये की तरह साथ रही। इसी कारण जिलास्तर पर कोच ने शुरुआत में ही ट्रेनिंग देने से इंकार भी कर दिया। कहा कि जो बेटी मां के सहारे यहां तक आती है आगे कैसे जाएगी? कोच के इंकार के कारण दिक्षा को बुखार चढ़ गया। डॉक्टर को दिखाया फिर एक ने समझाया बेटी को बुखार नहीं बल्कि स्केटिंग का बुखार है। यह मैदान में ही उतरेगा।

जब कोई कोच नहीं मिला तो पिता मायाचंद जोकि रोडवेज कर्मी हैं और माता मोटरसाइकिल पर बैठते और रात के अंधेरे में जलबेहड़ा रोड पर 12 बजे से बेटी को प्रेक्टिस करवाते। बेटी मोटरसाइकिल पीछे से पकड़कर स्केटिंग में अपनी गति बढ़ाती इस तरह स्टेट में पहुंच गई और सभी को हैरान कर दिया। आर्थिक हालात भी ज्यादा अच्छे नहीं थे तो मां-बेटी जहां भी जाते ऑटो से जाते। लेकिन ऑटो के इसी सफर की बदौलत दीक्ष ने जहाज तक का सफर तय कर दिया।
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इस तरह लगाई दिक्षा ने लगा दी पदकों की झड़ी:
  • 2006 में नेशनल स्कूल चैंपियनशिप अहमदाबाद में हिस्सा लिया।
  • 2006 में रॉलर स्केटिंग फेडरेशन आफ इंडिया की प्रतियोगिता में कोलकाता और नागपुर में खेली।
  • छावनी के एसडी कॉलेज में सीनियर अंडर आफिसर रही।
  • 2012 में एशियन गेम्स में चीन में खेलकर आई
  • 9 बार नेशनल में गोल्ड मेडल
  • सीबीएसई की राष्ट्रीय स्पीड स्केटिंग चैंपियनशिप में दो बार गोल्ड
  • पहला गोल्ड विशाखापट्टनम, दूसरा चंडीगढ़ में जीता फिर नहीं रूकी।
  • स्टेट हरियाणा ओलंपिक में 2009 में गोल्ड जीता
  • पूने में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रोल बॉल 2009 में गोल्ड
  • इंटर यूनिवर्सिटी क्रिकेट चैंपियनशिप 2011 में सिल्वर मेडल।
  • 3 बार सिल्वर और एक बार बनी रजत पदक विजेता।
  • एनसीसी की कैैडेट रहते हुए 2010 में टीएसई कैंप दिल्ली में 28 सेकेंड का रिकार्ड और फायरिंग में गोल्ड मेडल
  • ऑल इंडिया क्रिकेट इंटर यूनिवर्सिटी में कश्मीर में 2012 में हिस्सा लिया।
  • 5, 3 और 2 लाख रुपये की नकद राशि जीती।
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