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2.50 लाख क्यूआर कोड और यूआईडी रंग के संग उड़ गए 1.5 करोड़

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घरों के बाहर निगम द्वारा लगाए क्यूआर कोड मिटे हुए। - फोटो : Ambala
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उमेश भार्गव, अंबाला
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2.50 लाख क्यूआर कोड और यूनिक आईडी के रंग में करीब 1.5 करोड़ रुपये उड़ गए। चौकिए नहीं। यह एकदम सच है। न केवल डेढ़ करोड़ रुपये उड़े बल्कि अब इतने ही रुपये दोबारा से उड़ाने की तैयार पूरी हो गई है। सरकारी खजाना खाली हो रहा है और नगर निगम अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। दरअसल वर्ष 2017-2018 में अंबाला नगर निगम एरिया जोकि ट्विन सिटी तक फैला था में सभी मकान, दुकान, प्रतिष्ठान और प्लाटों को विशेष पहचान देने के लिए यूनिक आईडी नंबर जारी किए गए। इतना ही नहीं प्रत्येक यूनिक आईडी का क्यूआर कोड भी तैयार किया गया। क्यूआर कोड और यूनिक आईडी की प्लेट तैयार कर उसे अंबाला शहर और छावनी नगर निगम एरिया में लगा दिया गया। अभी इन नंबर प्लेट को लगे हुए करीब ढाई साल ही पूरे हुए थे कि इनमें से ज्यादातर नंबर प्लेटों का रंग के संग नंबर और कोड भी साफ हो चुके हैं।
करीब 60 रुपये की एक नंबर प्लेट
बता दें कि ट्विन सिटी में घरों के बाहर लगाई गई इन नंबर प्लेट की कीमत 60 रुपये प्रति घर तय की गई थी। क्योंकि 30 रुपये प्रति घर प्रापर्टी टैक्स के बिल जोकि कागज के होते हैं का ठेका दिया जाता है। इसीलिए यह राशि आसानी से पास कर दी गई थी।
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क्यों लगाई गई थी यूआईडी और क्यूआर प्लेट
नगर निगम एरिया में 2.20 लाख प्रापर्टी है। इनमें खाली प्लाट भी शामिल हैं। जबकि नगर निगम क्षेत्र में उस समय शामिल किए गए 27 गांव के लगभग 32 हजार घरों को भी शामिल किया गया था। नगर निगम ने तर्क दिया था कि यूआईडी नंबर जारी होने से प्रापर्टी टैक्स के बिल जारी करने और संबंधित आईडी की जानकारी क्षण में भी इस यूआईडी नंबर से मिल जाएगी। इतना ही नहीं क्यूआर कोड स्कैन करने से यह पता चल जाएगा कि डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाला वहां जा रहा है या नहीं। इसीलिए करोड़ से ज्यादा रुपये इन नंबर प्लेट पर पानी की तरह बहा दिए गए।
ठेकेदार की बल्ले-बल्ले करने के लिए बंद करवा दी स्कैनिंग
ट्विन सिटी में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए शर्त रखी गई कि ठेकेदार के कर्मी जहां से भी कूड़ा उठाएंगे वहीं से क्यूआर कोड स्कैन होगा। इसके लिए कूड़ा उठाने वाले ठेकेदार को 35 लाख रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त दिए गए। लेकिन ठेकेदार मात्र 10 प्रतिशत क्यूआर कोड ही स्कैन कर पाया। अलबत्ता ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए यह स्कैनिंग योजना ही बंद करवा दी गई।
यूआईडी नंबर को लेकर नई कंपनी अब पूरे स्टेट का काम कर रही है और अब नए नंबर लगेंगे। 2017-18 में क्यूआर कोड और यूआईडी नंबर लगे थे इसकी जानकारी नहीं है। मेरे संज्ञान में तो 2013 में नंबर प्लेट लगाई गई थी। -विरेंद्र सहारन, ईओ नगर निगम।
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यूआईडी और क्यूआर कोड प्लेट के नाम पर नगर निगम में बड़ा घोटाला किया गया है। सारी नंबर प्लेट और क्यू आर कोड प्लेट साफ हो गई हैं। निश्चित तौर पर मैं खुद इस मामले में नगर निगम आयुक्त और गृहमंत्री अनिल विज से बातचीत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग करूंगा। सरकारी खजाने को इस तरह लुटने नहीं दिया जाएगा।
-रमेशमल, पूर्व मेयर।
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