अंबाला। छावनी नागरिक अस्पताल में पहली बार मस्कुलर डिस्ट्राफी बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए शुक्रवार को पहली बार शिविर लगाया गया। अस्पताल के हॉल में ही अलग से व्यवस्था की गई थी।
इसमें अंबाला के 20 मरीजों ने आकर लाभ उठाया। परिजनों संग आए मरीजों के रजिस्ट्रेशन के बाद टेस्ट हुए। साथ ही संबंधित डॉक्टरों ने टीम ने स्वास्थ्य जांचा व निशुल्क दवाई भी दी। शिविर में आए मरीजों के परिजनों ने मांग उठाई है कि समय-समय पर इस तरह से शिविर लगाए जाने चाहिए। इन मरीजों के लिए चिरायु कार्ड भी बनाए गए, जिससे कि वह कहीं भी आसानी से उपचार करा सके।
इस बीमारी का उपचार नहीं है। केवल मरीजों को असहनीय दर्द से छुटकारा दिलवाने के लिए दवाएं दी जाती हैं। दरअसल, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक मांसपेशी विकृति रोग है, जिसके लक्षण बच्चे की तीन साल की उम्र के बाद दिखाई देते हैं। बच्चा चलते-चलते गिरने लगता है। धीरे-धीरे बच्चे चलने-फिरने, खाने-पीने में असमर्थ हो जाते हैं।
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण
- चलते-चलते गिरना
-लेटने या बैठने की स्थिति से उठने में कठिनाई
-दौड़ने और कूदने में परेशानी
-डगमगाती चाल, पैर की उंगलियों पर चलना
-पैरों और पिंडलियों की बड़ी मांसपेशियां
-मांसपेशियों में दर्द और जकड़न
-सीखने में समस्याएं
फोटो नंबर - 39
समय-समय पर लगाए जाएं शिविर
अंबाला कैंट निवासी विभोर के परिजन बोले कि स्वास्थ्य विभाग की यह पहल अच्छी है। समय-समय पर इस तरह के शिविर लगे तो लाभ मिलेगा। इस शिविर में केवल टेस्ट आदि होते हैं जो उन्हें नियमित तौर पर करवाने होते हैं लेकिन अभी तक इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है।
फोटो नंबर - 38
फिजियोथैरेपी की भी व्यवस्था हो
अंबाला कैंट निवासी चैरिश के परिजनों ने बताया कि शिविर के साथ-साथ इस तरह के मरीजों की स्पेशल फिजियोथैरेपी के लिए भी कोई व्यवस्था होनी चाहिए ताकि बच्चों को उसका लाभ मिल सके। अभी वह ही अपने स्तर पर तबीयत बिगड़ने पर फिजियोथैरेपी करते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों के लिए अलग तरह से फिजियोथैरेपी होती है।
अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में डॉक्टर मरीजों का उपचार करते हुए: संवाद
अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में डॉक्टर मरीजों का उपचार करते हुए: संवाद
अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में डॉक्टर मरीजों का उपचार करते हुए: संवाद